
मल्चिंग गन्ने की खेती में सबसे सस्ती और असरदार तकनीक है। सिर्फ ₹2,000/हेक्टेयर खर्च करो, ₹15,000/हेक्टेयर बचाओ। अगस्त 2026 में मल्चिंग जरूरी है।
गन्ने की पंक्तियों के बीच पुआल, भूसा या पत्तियां बिछाना — इसे मल्चिंग कहते हैं। यह मिट्टी को ढकता है और कई फायदे देता है।
मल्चिंग से मिट्टी में नमी बनी रहती है। सिंचाई 40% कम करनी पड़ती है।
पुआल के नीचे रोशनी नहीं पहुंचती। खरपतवार 70% कम होते हैं।
गर्मी में मिट्टी ठंडी रहती है। जड़ों को नुकसान नहीं होता।
पुआल सड़कर जैविक खाद बन जाता है। मिट्टी उपजाऊ होती है।
मल्चिंग से गन्ने की उपज 15–20% बढ़ जाती है।
| सामान | मात्रा/हेक्टेयर | खर्च |
|---|---|---|
| गेहूं का पुआल | 4–5 टन | ₹1,500–2,000 |
| मजदूरी | — | ₹500 |
| कुल | — | ₹2,000–2,500 |
| बचत | राशि/हेक्टेयर |
|---|---|
| सिंचाई में | ₹5,000 |
| खरपतवार नियंत्रण में | ₹3,000 |
| खाद में | ₹2,000 |
| ज्यादा उपज | ₹5,000 |
| कुल बचत | ₹15,000 |
₹2,000 खर्च, ₹15,000 बचत — 7.5 गुना फायदा!
गेहूं, चावल या गन्ने का पुआल इकट्ठा करें।
गन्ने की पंक्तियों के बीच 4–6 इंच मोटी परत बिछाएं।
पौधे से 15cm दूर रखें — तना सड़न न हो।
मल्चिंग के बाद हल्की सिंचाई करें — पुआल बैठ जाएगा।
| पुआल | फायदे | नुकसान |
|---|---|---|
| गेहूं का | सस्ता, आसानी से मिलता है | जल्दी सड़ता है |
| चावल का | देर तक टिकता है | महंगा |
| गन्ने की पत्तियां | मुफ्त | कम मात्रा |
| नारियल का | देर तक टिकता है | सबसे महंगा |
मल्चिंग गन्ना किसानों के लिए सबसे सस्ता और असरदार उपाय है। ₹2,000 खर्च करो, ₹15,000 बचाओ। अगस्त में जरूर करें!
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