
उत्तर प्रदेश के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों—विशेषकर रेतीली दोमट (Sandy Loam) मिट्टी वाले जनपदों जैसे बिजनौर, मुरादाबाद, सहारनपुर, शामली, बदायूं और पीलीभीत—में गन्ने की फसल को भूमिगत रूप से सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने वाले दो खतरनाक कीट सफेद गिडार (White Grub / Holotrichia consanguinea) और दीमक (Termite / Odontotermes obesus) हैं। ये दोनों कीट मिट्टी की सतह के नीचे छुपकर गन्ने की मुख्य पोषक जड़ों (Feed Roots) और तने के भूमिगत हिस्से को इतनी बेरहमी से कुतरते हैं कि 10 से 12 फीट ऊंचा हरा-भरा गन्ना देखते ही देखते सूख जाता है।
जब किसान खेत में जाता है, तो उसे ऊपर से लगता है कि शायद पानी की कमी या कोई फंगल बीमारी है, लेकिन जब वह सूखे गन्ने को हाथ से पकड़कर खींचता है, तो पूरा पौधा बिना किसी प्रयास के जड़ समेत उखड़कर हाथ में आ जाता है। जड़ों में अंग्रेजी के ‘C’ आकार की मोटी मटमैली सफेद सूंडी रेंगती हुई दिखाई देती है। यदि समय रहते इसका वैज्ञानिक उपचार न किया जाए, तो यह कीट पूरे के पूरे खेत को वीरान कर देता है और फसल में 40% से 60% तक का सीधा नुकसान हो जाता है।
इस 2200+ शब्दों की विस्तृत कीट प्रबंधन मार्गदर्शिका में हम सफेद गिडार और दीमक के जीवन चक्र, फसल में पहचान के लक्षण, रासायनिक दवाओं (फिप्रोनिल, क्लोरपायरीफॉस, इमिडाक्लोप्रिड) की सटीक डोज और जैविक फफूंद (Beauveria bassiana) द्वारा 100% सफल खात्मे की संपूर्ण वैज्ञानिक विधि साझा कर रहे हैं।
1. सफेद गिडार (White Grub): पहचान और क्षति का तरीका
सफेद गिडार वास्तव में ‘मई-जून बीटल’ (कंसुआ या गोबर भृंग) का लार्वा होता है।
- जीवन चक्र का रहस्य: मानसून की पहली भारी बारिश (जून के अंत या जुलाई) में इस भृंग के नर और मादा जमीन से बाहर निकलते हैं और नीम, बबूल या बेर के पेड़ों पर बैठकर संभोग करते हैं। रात में मादा भृंग गन्ने के खेत की बलुई मिट्टी में 5 से 10 सेमी गहराई में 50 से 60 अंडे देती है।
- खतरनाक अवस्था (जुलाई से अक्टूबर): अंडों से निकलने वाली गिडार (Grub) अगस्त और सितंबर के महीनों में सबसे अधिक भूखी और आक्रामक होती है। यह गन्ने की मुख्य मूसला जड़ और रेशेदार जड़ों को काट देती है।
- लक्षण: गन्ने की पत्तियां ऊपर से पीली होकर सूखने लगती हैं। हवा चलने पर पूरा पौधा जमीन पर गिर जाता है।
2. दीमक (Termite): पौधे को अंदर से खोखला करने वाला साइलेंट किलर
दीमक एक सामाजिक कीट है जो मिट्टी में बांबी (Mound) बनाकर लाखों की संख्या में रहता है:
- बुवाई के समय क्षति: गन्ने के टुकड़े (Setts) डालते ही दीमक गन्ने की मीठी पोरियों और संवेदनशील आंखों (Buds) को खा जाती है, जिससे जमाव मात्र 20-30% रह जाता है।
- खड़ी फसल में क्षति: खड़े गन्ने के तने के भीतर घुसकर सारा गूदा खा जाती है और तने के भीतर मिट्टी भर देती है। बाहर से गन्ना हरा दिखता है लेकिन अंदर से बिल्कुल खोखला हो जाता है।
रासायनिक उपचार: 3 सबसे अचूक कीटनाशक और उनकी प्रयोग विधि
भूमिगत कीटों को मारने के लिए पत्तियों पर स्प्रे करने से कोई लाभ नहीं होता; दवा को हर हाल में जड़ों के क्षेत्र (Root Zone) तक पहुंचाना अनिवार्य होता है।
विधि 1: बुवाई के समय दानेदार कीटनाशक (Preventive Basal Dose)
बुवाई करते समय गन्ने के टुकड़ों को नाली में बिछाने के बाद मिट्टी ढकने से ठीक पहले निम्नलिखित में से किसी एक दवा का प्रयोग करें:
- फिप्रोनिल 0.3% GR (Fipronil - जैसे रीजेंट / मोर्टार): 8 से 10 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से नालियों में समान रूप से बिखेरें।
- या कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 4% GR: 8 किग्रा प्रति एकड़।
- फायदा: यह दवा 90 दिनों तक मिट्टी में सक्रिय रहकर दीमक और गिडार के अंडों को तुरंत नष्ट कर देती है।
विधि 2: खड़ी फसल में ड्रेंचिंग (Root Zone Drenching in Standing Crop)
यदि खड़ी फसल (अगस्त-सितंबर) में सफेद गिडार का गंभीर प्रकोप दिख रहा है, तो तुरंत सिंचाई के पानी के साथ या नोजल हटाकर स्प्रेयर से ड्रेंचिंग करें:
| कीटनाशक का नाम व तकनीकी | प्रति एकड़ अनुशंसित मात्रा | प्रयोग की सटीक विधि | प्रभावशीलता |
|---|---|---|---|
| क्लोरपायरीफॉस 20% EC (Chlorpyrifos) | 2.0 लीटर / एकड़ | 200 लीटर पानी में घोलकर जड़ों के पास धार बनाकर डालें या सिंचाई की मुख्य नाली में टपकाएं। | दीमक और ग्रब का 2 घंटे में संपर्क से खात्मा। |
| फिप्रोनिल 40% + इमिडाक्लोप्रिड 40% WG (जैसे लेसेंटा) | 150 से 175 ग्राम / एकड़ | 250 लीटर पानी में घोलकर गन्ने के थानों की जड़ों के पास ड्रेंचिंग करें, बाद में हल्की सिंचाई दें। | प्रणालीगत (Systemic) असर, 6 माह तक पूर्ण सुरक्षा। |
| क्लोथियानिडिन 50% WDG (Clothianidin) | 100 से 120 ग्राम / एकड़ | रेत में मिलाकर जड़ों के पास डालें और तुरंत पानी लगाएं। | अत्यंत घातक न्यूरोटॉक्सिन, ग्रब तुरंत लकवाग्रस्त होकर मरता है। |
जैविक नियंत्रण: ‘बेवेरिया बेसियाना’ और ‘मेटाराइजियम’ का जादुई असर
जो किसान रासायनिक जहर का प्रयोग नहीं करना चाहते या जैविक गन्ने की खेती कर रहे हैं, उनके लिए एंटोमोपैथोजेनिक फंगस (कीटभक्षी फफूंद) सबसे सुरक्षित और टिकाऊ समाधान है:
- सामग्री:
- बेवेरिया बेसियाना (Beauveria bassiana): 2 किग्रा (पाउडर फॉर्म)
- मेटाराइजियम एनीसोप्ली (Metarhizium anisopliae): 2 किग्रा
- अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद या नम प्रेसमड: 100 किग्रा
- पुराना गुड़: 2 किग्रा
- संवर्धन विधि (Multiplication): 100 किग्रा गोबर की खाद में दोनों बायो-एजेंट और गुड़ का पानी मिलाकर छाया में 7 दिनों के लिए जूट की बोरी से ढककर रख दें। 7 दिनों में खाद के ऊपर सफेद फफूंद का जाल फैल जाएगा।
- प्रयोग: इसे खेत में नमी की स्थिति में कतारों में जड़ों के पास बिखेर दें।
- असर का तरीका: यह फंगस सफेद गिडार और दीमक की त्वचा में घुसकर उनके शरीर के भीतर माइसेलियम फैला देती है। 3 से 5 दिनों में गिडार पत्थर जैसी सख्त होकर मर जाती है और उस मरे हुए कीड़े से करोड़ों नए बीजाणु बनकर पूरे खेत के अन्य कीड़ों को भी संक्रमित कर मार डालते हैं।
प्रकाश प्रपंच (Light Trap) द्वारा वयस्क भृंगों का सामूहिक विनाश
गिदार बनने से पहले उसके जनक (बीटल) को मारना सबसे बुद्धिमान रणनीति है:
- मानसून की पहली बारिश के बाद जून-जुलाई में खेत के किनारे बांस के खंभे पर एक 100 वॉट का पीला बल्ब या सोलर लाइट ट्रैप लगाएं।
- बल्ब के ठीक नीचे एक बड़े तसले या टब में पानी भरकर उसमें थोड़ा सा मिट्टी का तेल या कीटनाशक मिला दें।
- रात 8:00 बजे से 11:00 बजे के बीच सैकड़ों भृंग रोशनी की ओर आकर्षित होकर टब में गिरकर तड़प-तड़प कर मर जाते हैं। एक मादा भृंग को मारने का मतलब है भविष्य के 60 सफेद गिडारों का खात्मा।
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