
गन्ने में तना छेदक गन्ने का सबसे प्रमुख और खतरनाक कीट है। यह कीट तने में सुरंग बनाकर गन्ने को अंदर से खोखला कर देता है। तना छेदक से गन्ने की पैदावार 20-50% तक कम हो सकती है। इस लेख में हम तना छेदक की पहचान, जीवन चक्र, नुकसान, इलाज और बचाव के सभी उपाय विस्तार से बताएंगे।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| कीट का नाम | तना छेदक (Stem Borer) |
| वैज्ञानिक नाम | Chilo infuscatellus (प्रारंभिक), Scirpophaga excerptalis (प्रमुख) |
| मुख्य नुकसान | तने में सुरंग, डेड हार्ट |
| पहचान | पत्तियों पर छेद, तने में सुरंग |
| सर्वोत्तम दवा | क्लोरैंट्रानिलिप्रोल, फिप्रोनिल |
| जैविक उपाय | ट्राइकोग्रामा, फेरोमोन ट्रैप |
| नुकसान | 20-50% तक पैदावार कम |
| बचाव | प्रतिरोधी किस्म + समय पर छिड़काव |
यह लेख CaneUp टीम द्वारा कीट विज्ञान विशेषज्ञों और ICAR-भारतीय गन्ने अनुसंधान संस्थान (IISR) के शोध के आधार पर तैयार किया गया है।
तना छेदक एक पतंगा (मॉथ) है जिसका लार्वा गन्ने के तने में प्रवेश करके सुरंग बनाता है। यह गन्ने का सबसे पुराना और सबसे खतरनाक कीट है।
| प्रजाति | आम नाम | नुकसान |
|---|---|---|
| Chilo infusstatellus | प्रारंभिक तना छेदक | शुरुआती अवस्था में |
| Scirpophaga excerptalis | प्रमुख तना छेदक | गंभीर नुकसान |
| Chilo auricilius | गुलाबी तना छेदक | मध्यम नुकसान |
| Sesamia inferens | गुलाबी बोरर | मध्यम नुकसान |
“डेड हार्ट” तना छेदक का सबसे पहला और स्पष्ट लक्षण है। अगर गन्ने के बीच की पत्ती सूखी दिखे तो तुरंत जाँच करें। तने को काटकर देखें — अंदर सुरंग और कीड़े दिखेंगे।
| चरण | अवधि | विवरण |
|---|---|---|
| अंडा | 5-7 दिन | पत्तियों के नीचे समूह में |
| लार्वा | 25-35 दिन | तने में सुरंग बनाता है |
| प्यूपा | 7-10 दिन | तने में ही |
| वयस्क (पतंगा) | 5-7 दिन | अंडे देता है |
| कुल | 42-59 दिन | — |
| नुकसान | विवरण |
|---|---|
| तने में सुरंग | तना खोखला |
| डेड हार्ट | पत्तियाँ सूखती हैं |
| तना टूटना | हवा में गिरना |
| गाँठें खराब | चीनी कम |
| नुकसान | विवरण |
|---|---|
| रोग प्रवेश | सुरंग से रोगकारक |
| लाल सड़न | तना छेदक से फैलता है |
| पैदावार कम | 20-50% तक |
| चीनी कम | 1-3% तक |
| बीज खराब | संक्रमित तना |
| दवा का नाम | मात्रा (प्रति लीटर पानी) | विशेषता |
|---|---|---|
| क्लोरैंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC | 0.3 मिली | सबसे प्रभावी |
| फिप्रोनिल 5% SC | 1.5 मिली | लार्वा मारता है |
| कार्बोसल्फान 25% WP | 2 ग्राम | प्रारंभिक अवस्था |
| क्विनालफॉस 25% EC | 2 मिली | गंभीर संक्रमण |
| लैंब्डासाइहैलोथ्रिन 4.9% CS | 0.5 मिली | नई पीढ़ी |
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पहला छिड़काव | बुवाई के 30-35 दिन बाद |
| दूसरा छिड़काव | बुवाई के 60-65 दिन बाद |
| समय | सुबह 6-9 बजे या शाम 4-6 बजे |
| तरीका | तने पर छिड़काव |
| अंतराल | 25-30 दिन |
| अवस्था | दवा | मात्रा/एकड़ |
|---|---|---|
| 30-35 दिन | क्लोरैंट्रानिलिप्रोल | 200 मिली |
| 60-65 दिन | फिप्रोनिल | 200 मिली |
| 90-100 दिन | कार्बोसल्फान | 500 ग्राम |
तना छेदक के लिए क्लोरैंट्रानिलिप्रोल (प्रोक्लेम) सबसे प्रभावी दवा है। यह लार्वा को मारती है और 15-20 दिन तक सुरक्षा देती है। बुवाई के 30-35 दिन बाद पहला छिड़काव सबसे जरूरी है।
तरीका:
फायदे:
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फायदे:
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फायदे:
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फायदे:
| किस्म | तना छेदक प्रतिरोध | उपज |
|---|---|---|
| Co 0238 | मध्यम | अधिक |
| Co 0118 | प्रतिरोधी | अधिक |
| CoJ 64 | प्रतिरोधी | अधिक |
| Co 86032 | मध्यम | अधिक |
| चरण | उपाय | समय |
|---|---|---|
| 1 | प्रतिरोधी किस्म | बुवाई से पहले |
| 2 | बीज उपचार | बुवाई से पहले |
| 3 | अगेती बुवाई | फरवरी-मार्च |
| 4 | फेरोमोन ट्रैप | बुवाई के साथ |
| 5 | ट्राइकोग्रामा | 30-45 दिन |
| 6 | निगरानी | हर हफ्ते |
| 7 | रासायनिक छिड़काव | जरूरत पड़ने पर |
| 8 | फसल अवशेष प्रबंधन | कटाई के बाद |
ट्राइकोग्रामा + फेरोमोन ट्रैप + क्लोरैंट्रानिलिप्रोल — यह तीनों मिलकर तना छेदक पर 90% से अधिक नियंत्रण देते हैं। पहले जैविक उपाय अपनाएं, जरूरत पड़ने पर ही रासायनिक दवा का उपयोग करें।
| संक्रमण स्तर | कार्रवाई |
|---|---|
| 5% से कम | निगरानी जारी रखें |
| 5-10% | जैविक नियंत्रण |
| 10-15% | रासायनिक छिड़काव |
| 15% से अधिक | तुरंत छिड़काव |
तना छेदक को हल्के में न लें। यह कीट गन्ने को अंदर से खोखला कर देता है। एक बार सुरंग बन जाए तो रासायनिक दवा भी अंदर नहीं पहुँचती। इसलिए रोकथाम सबसे जरूरी है। समय पर निगरानी और पहले छिड़काव से ही तना छेदक नियंत्रित होता है।
गन्ने में तना छेदक गन्ने का सबसे खतरनाक कीट है जो तने में सुंरग बनाकर पैदावार 20-50% तक कम कर सकता है। क्लोरैंट्रानिलिप्रोल सबसे प्रभावी कीटनाशक है। ट्राइकोग्रामा परजीवी अंडे और फेरोमोन ट्रैप — ये जैविक उपाय भी बहुत प्रभावी हैं। प्रतिरोधी किस्म लगाना, अगेती बुवाई और खेत की सफाई — ये बचाव के मुख्य उपाय हैं। एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) अपनाकर तना छेदक से प्रभावी ढंग से बचा जा सकता है।
उत्तर: तना छेदक की पहचान के मुख्य लक्षण हैं — पत्तियों पर छोटे-छोटे छेद, “डेड हार्ट” (बीच की पत्ती सूखना), तने में सुरंग और गाँठों पर छेद के निशान। तने को काटकर देखने पर अंदर कीड़े और सुरंग दिखती है।
उत्तर: क्लोरैंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC (प्रोक्लेम) सबसे प्रभावी दवा है। यह लार्वा को मारती है और 15-20 दिन तक सुरक्षा देती है। फिप्रोनिल और कार्बोसल्फान भी अच्छे विकल्प हैं।
उत्तर: ट्राइकोग्रामा एक परजीवी कीट है जो तना छेदक के अंडों पर अपने अंडे देता है। 50,000 परजीवी अंडे प्रति एकड़ की दर से 3-4 बार (15 दिन के अंतराल पर) छोड़ें। बुवाई के 30-45 दिन बाद शुरू करें।
उत्तर: प्रतिरोधी किस्म (Co 0118) लगाना, अगेती बुवाई (फरवरी-मार्च), फेरोमोन ट्रैप लगाना, ट्राइकोग्रामा छोड़ना और समय पर क्लोरैंट्रानिलिप्रोल का छिड़काव — ये सभी मिलकर तना छेदक से प्रभावी बचाव देते हैं।
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