
उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत से प्रदेश की लगभग 119 चीनी मिलें एक-एक करके चलना शुरू कर देंगी, और उसके बाद अगले 5-6 महीनों तक गन्ना कटाई, आपूर्ति और भुगतान का सिलसिला चलता रहेगा। जो किसान इस सीजन की तैयारी पहले से करके रखते हैं, उनका गन्ना समय पर मिल पहुंचता है, तौल में नुकसान कम होता है, कटौती घटती है और भुगतान भी जल्दी मिलता है। वहीं जो किसान आखिरी समय में भागदौड़ करते हैं, उन्हें पर्ची, ट्रॉली, मजदूर और तौल — हर जगह दिक्कत झेलनी पड़ती है।
इस गाइड में हम पेराई सत्र की पूरी तैयारी को क्रमवार समझेंगे — खेत की तैयारी से लेकर कटाई, मिल गेट की प्रक्रिया, तौल की समझदारी, कटौती से बचाव, भुगतान की ट्रैकिंग और कटाई के बाद पेड़ी खेत के काम तक। यह जानकारी UP के हर गन्ना किसान के काम की है, चाहे आपकी 2 बीघा गन्ना हो या 20 एकड़।
1. कटाई से पहले खेत की तैयारी — सबसे अहम चरण
अच्छी आपूर्ति की नींव कटाई से 3-4 हफ्ते पहले खेत में ही रखी जाती है। इस दौरान ये काम जरूर करें:
सिंचाई बंद करने का सही समय: फसल पकने पर कटाई से लगभग 2-3 सप्ताह पहले सिंचाई बंद कर देना मानक सिफारिश है। इससे गन्ने में शर्करा (चीनी) की मात्रा बढ़ती है और रिकवरी बेहतर होती है। अगर कटाई तक खेत गीला रहा तो गन्ना भारी तो लगेगा, लेकिन चीनी की मात्रा कम होगी और मिल में वजन के साथ-साथ गुणवत्ता में भी नुकसान होगा। हां, बहुत ज्यादा सूखा भी न होने दें — मिट्टी में हल्की नमी रहनी चाहिए ताकि कटाई आसान हो और ठूंठ (स्टबल) न फटे।
खेत की सफाई: खेत में गिरी सूखी पत्तियां, खरपतवार और किनारे की झाड़ियां हटा दें। साफ खेत में कटाई तेज होती है, मजदूर कम समय लेते हैं और ट्रॉली तक गन्ना पहुंचाना आसान होता है।
रास्ता और बंधान: खेत से सड़क तक का रास्ता ठीक कर लें। बरसात के बाद कई खेतों के रास्ते खराब हो जाते हैं, जिससे ट्रॉली फंसती है और समय बर्बाद होता है। बंधान (मेड़) की मरम्मत भी इसी समय कर लें।
पानी निकासी: अगर खेत में जलभराव है तो कटाई से पहले पानी निकाल दें। गीले खेत में कटाई धीमी होती है और गन्ने में मिट्टी चिपकती है, जो बाद में तौल में कटौती का कारण बनती है।
2. गन्ना कब काटें — पकने की पहचान
जल्दबाजी में कच्चा गन्ना काटना सबसे बड़ा नुकसान है। कच्चे गन्ने में चीनी कम और पानी ज्यादा होता है — वजन तो मिल जाएगा, लेकिन मिल की रिकवरी घटेगी और लंबे समय में यही आदत किसान की साख खराब करती है। पके गन्ने की पहचान इस तरह करें:
- गन्ने की निचली पत्तियां सूखकर पीली पड़ने लगती हैं।
- गन्ने की आंखें (बड्स) फूल जाती हैं और अंकुरण की तैयारी दिखती है।
- डंठल ठोकने पर खोखली आवाज की जगह ठोस, भारी आवाज आती है।
- गन्ने का रंग किस्म के अनुसार गहरा होता जाता है।
सामान्य नियम यह है कि बुवाई के लगभग 10-12 महीने बाद गन्ना पकता है। शरदकालीन (अक्टूबर) में बोया गया गन्ना अगले साल अक्टूबर-नवंबर तक, और बसंतकालीन (फरवरी-मार्च) में बोया गया गन्ना दिसंबर-जनवरी तक अच्छी तरह पक जाता है। अपनी मिल का पेराई कार्यक्रम और पर्ची कैलेंडर देखकर कटाई का समय तय करें — पर्ची मिलने से 1-2 दिन पहले कटाई शुरू करना आदर्श रहता है, ताकि गन्ना ताजा मिल पहुंचे।
3. कटाई की सही विधि — हर क्विंटल गिनता है
कटाई में लापरवाही सीधे पैदावार घटाती है। इन बातों का ध्यान रखें:
जमीन के बराबर काटें: गन्ना जितना ऊपर से कटेगा, उतना वजन खेत में ही छूट जाएगा। हर इंच ऊंचा ठूंठ मतलब प्रति एकड़ क्विंटलों का नुकसान। तेज धार वाले गंडासे/दरांती से जमीन के बिल्कुल बराबर कटाई करवाएं। मजदूरों को पहले ही दिन यह बात साफ-साफ समझा दें।
साफ-सफाई के साथ कटाई: सूखी पत्तियां (ट्रैश) अलग कर दें। पत्ती समेत गन्ना तौल में जाता है तो मिल में ट्रैश के नाम पर कटौती होती है। साथ ही जड़ वाला हिस्सा और मिट्टी लगी गांठें भी हटा दें।
टॉपिंग: गन्ने का ऊपरी हरा हिस्सा (टॉप) अलग कर दें। टॉप में चीनी नहीं के बराबर होती है और यह वजन बढ़ाकर भ्रम पैदा करता है — मिल में इसकी कटौती होती है। टॉप को पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करें, यह बर्बाद न जाने दें।
बंडलिंग: गन्ने के बंडल एक समान आकार के बनवाएं ताकि ट्रॉली में लदान (लोडिंग) व्यवस्थित हो और गिनती में आसानी रहे। बिखरा हुआ गन्ना लदान-उतरान में टूटता है और नुकसान बढ़ता है।
ताजा आपूर्ति: कटा हुआ गन्ना जितनी जल्दी मिल पहुंचे, उतना अच्छा। 24 घंटे से ज्यादा पुराना (बासी) गन्ना सूखने लगता है — वजन घटता है और चीनी की मात्रा भी कम होती है। इसलिए कटाई और परिवहन की योजना एक साथ बनाएं, अलग-अलग नहीं।
4. कागजात पहले से तैयार रखें — पर्ची से भुगतान तक
पेराई सत्र में सबसे ज्यादा भागदौड़ कागजों को लेकर होती है। ये दस्तावेज अक्टूबर से पहले ही एक फाइल में तैयार कर लें:
| दस्तावेज | क्यों जरूरी है |
|---|---|
| गन्ना सट्टा / सर्वे पर्ची | मिल में गन्ना आपूर्ति का आधार, बेसिक कोटा इसी पर तय होता है |
| आधार कार्ड | पहचान सत्यापन और DBT भुगतान के लिए |
| बैंक पासबुक / खाता विवरण | भुगतान सीधे खाते में आता है, खाता सक्रिय रखें |
| मोबाइल नंबर (चालू) | पर्ची/कैलेंडर की SMS सूचना और Smart Ganna Kisan ऐप OTP के लिए |
| पिछले सत्र की तौल पर्चियां | बकाया भुगतान के दावे और रिकॉर्ड के लिए सबूत |
Smart Ganna Kisan ऐप: अगर अभी तक ऐप इंस्टॉल नहीं किया है तो कर लें। इसी से पर्ची कैलेंडर, सट्टा विवरण और आपूर्ति की स्थिति देखी जाती है। ऐप में अपना मोबाइल नंबर अपडेट रखें — पुराना नंबर बंद हो गया है तो गन्ना समिति में जाकर बदलवाएं, वरना पर्ची की सूचना नहीं मिलेगी।
बेसिक कोटा समझें: हर किसान का बेसिक कोटा उसके सट्टे/सर्वे रकबे के आधार पर तय होता है। अगर आपको लगता है कि आपका रकबा या किस्म गलत दर्ज है, तो पेराई शुरू होने से पहले गन्ना समिति में संशोधन करवा लें। सत्र शुरू होने के बाद संशोधन में समय लगता है और आपूर्ति अटक सकती है।
5. मिल गेट पर तौल — यहीं होता है असली खेल
गन्ने का पैसा तौल पर तय होता है, इसलिए इस चरण को हल्के में न लें:
डिजिटल कांटे की पर्ची जरूर लें: मिल गेट पर गन्ना तौलते समय कंप्यूटराइज्ड तौल पर्ची मिलती है — खाली ट्रॉली का वजन (टेयर), भरी ट्रॉली का वजन (ग्रॉस) और शुद्ध गन्ने का वजन (नेट) इस पर दर्ज होता है। यह पर्ची संभालकर रखें, यही आपके भुगतान का आधार है।
तौल के समय मौजूद रहें या विश्वसनीय व्यक्ति भेजें: हो सके तो तौल के समय खुद या परिवार का कोई सदस्य मौजूद रहे। कांटे पर चढ़ते-उतरते समय ध्यान दें — ट्रॉली पूरी तरह कांटे पर होनी चाहिए, न आगे निकली, न पीछे।
एक ही मिल/क्रय केंद्र पर नियमित आपूर्ति: बार-बार केंद्र बदलने से रिकॉर्ड बिखरता है और बकाया ट्रैक करने में दिक्कत होती है। अपने निर्धारित क्रय केंद्र पर ही आपूर्ति करें।
समय पर पहुंचें: पर्ची पर लिखी तारीख और समय का पालन करें। देर से पहुंचा गन्ना अगले दिन की लाइन में लगता है, गन्ना बासी होता है और वजन घटता है।
वजन का हिसाब खुद रखें: हर तौल पर्ची का वजन एक डायरी या मोबाइल नोट में लिखते जाएं। सत्र के अंत में कुल आपूर्ति का हिसाब मिल के रिकॉर्ड से मिलाएं — अंतर दिखे तो तुरंत गन्ना समिति में शिकायत करें।
6. कटौती (कमी/डिडक्शन) से कैसे बचें
मिल में तौल के बाद कई तरह की कटौतियां लगती हैं। इनमें से ज्यादातर से बचा जा सकता है:
- ट्रैश कटौती: सूखी पत्ती और कचरा मिलाकर न भेजें। साफ गन्ने पर यह कटौती नहीं लगती।
- मिट्टी/जड़ की कटौती: बरसात या गीले खेत से निकले गन्ने में मिट्टी चिपकी होती है। कटाई से पहले खेत सुखाएं और जड़ वाला हिस्सा साफ करें।
- टॉप कटौती: हरा टॉप काटकर अलग कर दें, चारे में इस्तेमाल करें।
- बासी गन्ना: 24 घंटे से ज्यादा पुराने गन्ने पर गुणवत्ता कटौती लग सकती है। ताजा आपूर्ति ही सबसे बड़ा बचाव है।
- जला हुआ गन्ना: खेत में आग लगाकर कटाई न करें। जले गन्ने की गुणवत्ता खराब होती है और इस पर भारी कटौती या अस्वीकृति हो सकती है।
एक सामान्य नियम याद रखें: जितना साफ और ताजा गन्ना, उतनी कम कटौती। कटौती से बचा हर क्विंटल सीधे आपकी जेब में जाता है।
7. परिवहन और मजदूर की योजना पहले से बनाएं
पेराई सत्र में ट्रॉली, ट्रक और कटाई मजदूरों की मांग बहुत बढ़ जाती है। आखिरी समय में बुकिंग कराने पर दोगुना किराया देना पड़ता है:
- परिवहन: अपने क्षेत्र के ट्रॉली/ट्रक मालिकों से अक्टूबर से पहले ही बात कर लें। पूरी सत्र की दर तय कर लें — प्रति ट्रिप या प्रति क्विंटल, जो भी प्रचलन हो। लिखित में दर तय करना बेहतर रहता है।
- मजदूर: कटाई मजदूरों की टोली (गैंग) पहले से बुक करें। अच्छे मजदूर सत्र शुरू होते ही बुक हो जाते हैं।
- वाहन प्रवेश: मिल में वाहन के प्रवेश के लिए जरूरी पास/टोकन की प्रक्रिया पहले से जान लें। कई मिलों में ऑनलाइन या समिति के माध्यम से पंजीकरण होता है।
- रात्रि आपूर्ति: अगर आपकी पर्ची रात की है तो रोशनी और सुरक्षा का इंतजाम रखें। रात में तौल में गड़बड़ी की शिकायतें ज्यादा आती हैं — इसलिए रात की पर्ची पर extra सतर्क रहें।
8. भुगतान पर नज़र — 14 दिन का नियम
गन्ना आपूर्ति के बाद सबसे अहम है भुगतान। नियम के अनुसार चीनी मिल को गन्ना खरीद के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है, और देरी पर ब्याज का प्रावधान भी है। इसके लिए:
हर तौल पर्ची संभालें: यही आपके भुगतान का सबूत है। पर्चियों को तारीख के क्रम में फाइल में रखें या मोबाइल से फोटो लेकर सुरक्षित रखें।
नियमित हिसाब मिलाएं: हर महीने अपनी कुल आपूर्ति और मिल से आए भुगतान का मिलान करें। Smart Ganna Kisan ऐप और बैंक स्टेटमेंट दोनों से क्रॉस-चेक करें।
बकाया दिखे तो तुरंत कार्रवाई: अगर भुगतान 14 दिन से ज्यादा लटका है तो पहले गन्ना समिति में लिखित शिकायत दें। इसके बाद जिला गन्ना अधिकारी और फिर गन्ना आयुक्त कार्यालय तक शिकायत का रास्ता खुला है। सामूहिक शिकायत (कई किसान मिलकर) हमेशा ज्यादा असर करती है — अकेले चुप न बैठें।
ब्याज का दावा: देरी से भुगतान पर ब्याज का नियम है। अपनी शिकायत में बकाया राशि के साथ ब्याज की मांग भी लिखित में दर्ज कराएं।
खाता सक्रिय रखें: DBT से भुगतान सीधे बैंक खाते में आता है। खाता निष्क्रिय या KYC अधूरी होने पर भुगतान अटक सकता है — सत्र से पहले बैंक जाकर KYC अपडेट करवा लें।
9. कटाई के बाद पेड़ी (रटून) खेत का काम — अगले साल की तैयारी
जिस खेत से गन्ना कट गया है, वहां अगले 2-3 हफ्तों में किया गया काम अगले साल की पेड़ी फसल तय करता है। कटाई के तुरंत बाद:
ठूंठ प्रबंधन: ऊंचे ठूंठों को जमीन के बराबर काटें। इससे नए कल्ले (टिलर) एक समान निकलते हैं और फसल एक जैसी बढ़ती है।
गैप फिलिंग: जहां पौधे छूट गए हैं (गैप), वहां 2-3 सप्ताह के भीतर दो-आंख वाली गन्ने की कलमें लगाकर गैप भरें। देर से भरे गैप में पौधे पिछड़ जाते हैं।
ट्रैश मल्चिंग: कटाई के बाद बची सूखी पत्तियों को खेत में ही बिछा दें (मल्चिंग)। इससे नमी बनी रहती है, खरपतवार कम उगते हैं और मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ता है। पत्तियों को जलाएं नहीं — जलाने से मिट्टी के लाभकारी जीव नष्ट होते हैं और पर्यावरण को नुकसान होता है।
पहली सिंचाई और खाद: गैप फिलिंग के बाद हल्की सिंचाई दें और संतुलित खाद डालें। मिट्टी परीक्षण के आधार पर खाद की मात्रा तय करना सबसे अच्छा रहता है — अंधाधुंध यूरिया डालने से फसल नरम और रोग-प्रवण होती है।
रटून में खरपतवार: पेड़ी फसल में शुरुआत में खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं। पहली निराई-गुड़ाई समय पर करें — देर करने पर पोषक तत्वों की होड़ में गन्ना पिछड़ जाता है।
10. पेराई सत्र 2026-27 — किसान चेकलिस्ट एक नजर में
- कटाई से 2-3 सप्ताह पहले सिंचाई बंद
- खेत की सफाई, रास्ता और बंधान ठीक
- कागजात (सट्टा, आधार, बैंक खाता, चालू मोबाइल) तैयार
- Smart Ganna Kisan ऐप में विवरण अपडेट
- बेसिक कोटा/रकबा संशोधन (जरूरत हो तो) सत्र से पहले
- परिवहन और मजदूर की अग्रिम बुकिंग
- पके गन्ने की ही कटाई, जमीन के बराबर, साफ-सुथरा
- तौल पर्ची हर बार लें और वजन का हिसाब रखें
- बकाया भुगतान की मासिक ट्रैकिंग
- कटाई के बाद पेड़ी खेत में गैप फिलिंग और मल्चिंग
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: पेराई सत्र 2026-27 कब शुरू होगा? उत्तर: UP में पेराई सत्र आमतौर पर अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में शुरू होता है। सटीक तारीख हर मिल अलग-अलग घोषित करती है — अपनी मिल की घोषणा और पर्ची कैलेंडर पर नजर रखें।
प्रश्न: गन्ना काटने के कितने समय के भीतर मिल पहुंचाना चाहिए? उत्तर: आदर्श रूप से 24 घंटे के भीतर। इससे ज्यादा पुराना गन्ना सूखने लगता है, वजन घटता है और गुणवत्ता कटौती का खतरा बढ़ता है।
प्रश्न: तौल में गड़बड़ी लगे तो क्या करें? उत्तर: तौल पर्ची संभालकर रखें और तुरंत गन्ना समिति में लिखित शिकायत दें। कांटे के सत्यापन (वेरिफिकेशन) की मांग की जा सकती है। सामूहिक शिकायत ज्यादा असर करती है।
प्रश्न: बेसिक कोटा कैसे बढ़ता है? उत्तर: बेसिक कोटा सट्टे/सर्वे के रकबे और पिछले आपूर्ति रिकॉर्ड के आधार पर तय होता है। रकबा बढ़ा है तो सत्र से पहले गन्ना समिति में संशोधन करवाएं।
प्रश्न: भुगतान कितने दिन में मिलना चाहिए? उत्तर: नियम के अनुसार गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान होना चाहिए। देरी होने पर ब्याज का प्रावधान है — बकाया दिखे तो लिखित शिकायत जरूर करें।
प्रश्न: क्या पत्तियां जलाकर खेत साफ करना ठीक है? उत्तर: नहीं। पत्तियां जलाने से मिट्टी के लाभकारी जीव नष्ट होते हैं और पोषक तत्व बर्बाद होते हैं। पत्तियों की मल्चिंग करें — यह नमी बचाती है और खाद का काम करती है।
प्रश्न: कटाई के बाद पेड़ी फसल के लिए सबसे जरूरी काम क्या है? उत्तर: 2-3 सप्ताह के भीतर गैप फिलिंग, ठूंठों को बराबर करना, ट्रैश मल्चिंग और संतुलित खाद के साथ हल्की सिंचाई। यही अगले साल की पैदावार तय करता है।
प्रश्न: गन्ने में कीट या रोग दिखे तो क्या करें? उत्तर: कीटनाशक या रोगनाशक का प्रयोग करने से पहले कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें। मात्रा के लिए कृषि विशेषज्ञ/कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें — अंदाजे से दवा छिड़कना फसल और जेब दोनों के लिए हानिकारक है।
पेराई सत्र 2026-27 में सफलता का मंत्र सीधा है — पहले तैयारी, फिर कटाई; साफ गन्ना, ताजा आपूर्ति; हर पर्ची संभालो, हर भुगतान गिनो। जो किसान यह अनुशासन अपनाते हैं, उनका न गन्ना अटकता है, न पैसा। इस गाइड को अपने किसान साथियों के साथ जरूर साझा करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इस सत्र का पूरा फायदा उठा सकें।
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
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