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गन्ने में Red Rot (लाल सड़न) से कैसे बचें — 7 अचूक उपाय और उपचार

Aamir Raza Aamir Raza • Aug 31, 2026 • 4 min read
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गन्ने में Red Rot (लाल सड़न) से कैसे बचें — 7 अचूक उपाय और उपचार
अंतिम अपडेट: August 31, 2026 10:10 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल पर रेड रॉट (Red Rot - लाल सड़न रोग) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसे “गन्ने का कैंसर” भी कहा जाता है। यदि समय रहते रोकथाम न की जाए, तो पूरी की पूरी फसल बर्बाद हो सकती है।

इस लेख में जानें रेड रॉट के लक्षण, बचाव के 7 मुख्य उपाय और समय पर किए जाने वाले जरूरी उपचार।


रेड रॉट (लाल सड़न) रोग: त्वरित सारांश

मुख्य बिंदुविवरण
रोग का नामरेड रॉट (लाल सड़न रोग / गन्ने का कैंसर)
कारक फफूंदColletotrichum falcatum
प्रमुख लक्षणपत्तियां पीली पड़ना, चीरने पर अंदर लाल रंग व सफेद चकत्ते, अल्कोहल जैसी बदबू
प्रतिरोधी किस्मेंCo-15023, Co-0118, CoLk-14201
प्रति बीघा संभावित नुकसान60% से 80% (₹25,000 – ₹40,000 प्रति बीघा)

1. Red Rot क्या है और इसके प्रमुख लक्षण?

रेड रॉट एक फफूंद जनित घातक रोग है। इसके मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • पत्तियों का सूखना: गन्ने के ऊपरी हिस्से की तीसरी या चौथी पत्ती किनारों से सूखने और पीली पड़ने लगती है।
  • गन्ना अंदर से लाल होना: तने को चीर कर देखने पर गूदा गहरा लाल दिखाई देता है, जिस पर आड़े सफेद धब्बे नजर आते हैं।
  • सिरके या अल्कोहल जैसी गंध: संक्रमित गन्ने से तेज खट्टी व सड़ी हुई गंध आती है।
  • वजन और मिठास में कमी: गन्ना अंदर से खोखला और सूखा हो जाता है तथा रस की मात्रा शून्य हो जाती है।

2. गन्ने को Red Rot से बचाने के 7 अचूक उपाय

रेड रॉट से बचने के लिए किसान भाइयों को ये 7 वैज्ञानिक उपाय तुरंत अपनाने चाहिए:

उपाय 1: रोग रोधी किस्मों (Resistant Varieties) का चयन

पुरानी संवेदनशील किस्म Co-0238 के स्थान पर नई रोग-प्रतिरोधी किस्में जैसे Co-15023, Co-0118, CoLk 14201 या Co-98014 की बुआई करें।

उपाय 2: बीज शोधन (Seed Treatment)

बुआई से पहले गन्ने के टुकड़ों को कार्बेंडाजिम (Carbendazim 50% WP) 2 ग्राम प्रति लीटर पानी या ट्राइकोडर्मा (Trichoderma) के 1% घोल में 15–20 मिनट तक उपचारित करें।

उपाय 3: उचित जल निकासी (Drainage Management)

खेत में जलभराव फफूंद को तेजी से फैलाता है। खेत में जल निकासी की समुचित नाली बनाएं ताकि बारिश का पानी जमा न रहे।

उपाय 4: फसल चक्र अपनाएं (Crop Rotation)

लगातार गन्ने की फसल न लें। गन्ने के बाद धान, सरसों, उड़द या मूंग जैसी फसलें लगाएं ताकि मिट्टी में मौजूद फंगस नष्ट हो सके।

उपाय 5: संक्रमित पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट करें (Rogueing)

खेत में जैसे ही लाल सड़न से ग्रसित पौधा दिखे, उसे जड़ सहित उखाड़कर खेत से दूर ले जाकर जला दें या गहरे गड्ढे में दबा दें। उस स्थान पर ब्लीचिंग पाउडर या चूना डालें।

उपाय 6: खेत में जलभराव से बचें (Avoid Waterlogging)

वर्षा ऋतु के दौरान खेत में पानी ठहरने न दें। मेड़ों को मजबूत रखें और अतिरिक्त पानी तुरंत बाहर निकालें।

उपाय 7: कृषि रक्षा अधिकारी को सूचित करें

यदि रोग बड़े पैमाने पर फैले तो तुरंत अपने नजदीकी गन्ना विकास परिषद, चीनी मिल या जिला कृषि रक्षा अधिकारी को सूचना दें।


3. रोग लग जाने पर आपातकालीन उपचार

यदि फसल में रेड रॉट के शुरुआती लक्षण दिखें, तो तुरंत निम्न कदम उठाएं:

  1. फफूंदनाशक का छिड़काव: थायोफिनेट मिथाइल (Thiophanate Methyl 70% WP) @ 2 ग्राम/लीटर या कार्बेन्डाजिम @ 1 ग्राम/लीटर का जड़ों के पास छिड़काव करें।
  2. ट्राइकोडर्मा का प्रयोग: 5 किग्रा ट्राइकोडर्मा को 100 किग्रा सड़ी गोबर की खाद में मिलाकर प्रति एकड़ खेत में नमी के समय डालें।
  3. पेड़ी (Ratoon) न रखें: संक्रमित खेत में अगले साल पेड़ी फसल कतई न छोड़ें।

4. बिना उपचार के प्रति बीघा नुकसान का अनुमान

स्थितिउत्पादन (क्विंटल/बीघा)किसान को नुकसान (₹/बीघा)
स्वस्थ फसल60 – 75 क्विंटल₹0 (पूरा लाभ)
मध्यम संक्रमण (20-30%)40 – 45 क्विंटल₹8,000 – ₹12,000
गंभीर संक्रमण (60-80%)15 – 25 क्विंटल₹25,000 – ₹40,000

5. यूपी गन्ना विभाग की सरकारी एडवाइजरी

उत्तर प्रदेश गन्ना विकास विभाग ने किसानों से अपील की है कि:

  • Co-0238 किस्म के बीज का प्रयोग बंद करें।
  • चीनी मिलों से प्रमाणित और उपचारित बीज ही लें।
  • प्रभावित खेतों की मिट्टी का परीक्षण करवाकर ट्राइकोडर्मा और जिप्सम का उपयोग करें।

निष्कर्ष (Conclusion)

रेड रॉट गन्ने की फसल के लिए बेहद विनाशकारी है, लेकिन सही समय पर रोग रोधी किस्मों के चयन और बीज उपचार से इससे 100% बचा जा सकता है।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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