
इस आर्टिकल में: CaneUp पर इस पोस्ट में गन्ना किसानों के लिए उपयोगी जानकारी दी गई है — गन्ना पर्ची कैलेंडर, MSP/FRP रेट, भुगतान स्थिति, सरकारी योजनाएं, eGanna App, खेती के टिप्स, और बिज़नेस आइडियाज। यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।
मानसून के दौरान उत्तर प्रदेश के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों—जैसे लखीमपुर खीरी, बलरामपुर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, शामली, पीलीभीत और कुशीनगर—में भारी बारिश और खेतों में जलभराव के कारण लाल सड़न (Red Rot) और टॉप बोरर (Top Borer) का भयानक प्रकोप देखा जा रहा है।
कृषि वैज्ञानिकों ने ‘लाल सड़न’ को गन्ने का कैंसर (Sugarcane Cancer) घोषित किया है क्योंकि एक बार यह बीमारी पौधे के संवहनी ऊतकों (Vascular Bundles) में प्रवेश कर जाए, तो पूरे गन्ने का रस सूख जाता है और पैदावार में 80% से 100% तक की भारी गिरावट आ जाती है।
यदि आपके खेत में भी गन्ने की पत्तियां पीली पड़ रही हैं या गोभ सूख रही है, तो बिना समय गंवाए यह मानसून उपचार तुरंत अपनाएं।
लाल सड़न एक कवक जनित (Fungal - Colletotrichum falcatum) रोग है। इसके मुख्य लक्षण:
| उपचार का चरण | दवा का नाम | प्रति एकड़ मात्रा (Dose) | प्रयोग विधि |
|---|---|---|---|
| ग्रसित पौधा उखाड़ना | — | तुरंत प्रभाव से | रोगी पौधे को जड़ सहित उखाड़कर गड्ढे में जला दें और उस जगह 10 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर डालें। |
| एंटीबायोटिक व फफूंदनाशक स्प्रे | स्ट्रेप्टोसाइक्लिन (Streptocycline) + कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (COC 50% WP) | 20 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन + 500 ग्राम COC प्रति एकड़ | 200 लीटर पानी में घोलकर गन्ने की जड़ों और तनों पर अच्छी तरह नहलाकर छिड़काव करें। |
| सिस्टेमिक फफूंदनाशक | पायराक्लोस्ट्रोबिन (Pyraclostrobin 20% WG) या अजॉक्सीस्ट्रोबिन + डाइफेनोकोनाजोल | 200 ग्राम या 200 मिली प्रति एकड़ | पौधे के अंदरूनी संक्रमण को रोकने के लिए 15 दिन बाद दूसरा स्प्रे करें। |
| जल निकासी (Drainage) | — | तुरंत | खेत में जमा बारिश का गंदा पानी नालियां बनाकर बाहर निकालें। |
अगस्त और सितंबर के महीने में टॉप बोरर की चौथी व पांचवीं पीढ़ी सक्रिय होती है:
बड़ा गन्ना होने के कारण किसान खेत के अंदर घुसकर स्प्रे नहीं कर पाते। उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग अब अनुदान पर कृषि ड्रोन (Agri Drone) उपलब्ध करा रहा है:
यदि आपके क्षेत्र में लाल सड़न महामारी का रूप ले रही है, तो तुरंत गन्ना विकास परिषद या विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क करें:
1800-121-3203अपने गन्ने की फसल को सुरक्षित रखें और इस महत्वपूर्ण एडवाइजरी को अपने साथी किसान भाइयों के साथ तुरंत शेयर करें!
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