होम › आर्टिकल्स › शरदकालीन गन्ना बुवाई ट्रेंच विधि 2026 — …

शरदकालीन गन्ना बुवाई ट्रेंच विधि 2026 — प्रति एकड़ 600 क्विंटल पैदावार का अचूक फॉर्मूला

Aamir Raza Aamir Raza • Sep 1, 2026 • अपडेट: Sep 5, 2026 10:00 AM IST • 10 min read
Google पर हमें फ़ॉलो करें
शेयर करें:
शरदकालीन गन्ना बुवाई ट्रेंच विधि 2026 — प्रति एकड़ 600 क्विंटल पैदावार का अचूक फॉर्मूला
अंतिम अपडेट: September 5, 2026 10:00 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मुख्य बिंदु (Quick Summary): सितंबर-अक्टूबर में ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई करने पर वसंतकालीन बुवाई की तुलना में 25-30% अधिक कल्ले (Tillers), गन्ने की मोटाई व 600 क्विंटल प्रति एकड़ तक बंपर उत्पादन प्राप्त होता है।

उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती करने वाले प्रगतिशील किसानों के लिए शरदकालीन गन्ना बुवाई (Autumn Sugarcane Planting) वरदान साबित हो रही है। सामान्यतः अधिकांश किसान फरवरी-मार्च या गेहूं कटाई के बाद अप्रैल-मई में गन्ने की बुवाई करते हैं, जिसे वसंतकालीन (Spring) या पछेती बुवाई कहा जाता है। लेकिन कृषि वैज्ञानिकों और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR), लखनऊ के अनुसंधानों ने यह सिद्ध कर दिया है कि 15 सितंबर से 31 अक्टूबर के मध्य की गई शरदकालीन बुवाई से न केवल गन्ने का जमाव (Germination) 85% से 90% तक होता है, बल्कि प्रति एकड़ पैदावार 500 से 600 क्विंटल (1,200 से 1,500 क्विंटल प्रति हेक्टेयर) तक आसानी से पहुंच जाती है।

पारंपरिक विधि (हल के पीछे 2 से 2.5 फीट पर गूल बनाकर बुवाई) की तुलना में जब किसान ट्रेंच विधि (Trench / Deep Furrow Method) से 4.5 से 5 फीट की दूरी पर गहरी नालियां बनाकर बुवाई करते हैं, तो पौधों को भरपूर धूप, हवा और पोषण मिलता है। इसके साथ ही गन्ने की दो लाइनों के बीच खाली पड़ी जमीन में आलू, सरसों, लहसुन, चना या मटर की सह-फसली खेती (Intercropping) करके बुवाई की पूरी लागत पहले 90 दिनों में ही वापस निकल आती है। आइए इस वैज्ञानिक गाइड में शरदकालीन ट्रेंच बुवाई के 600 क्विंटल फॉर्मूले को चरणबद्ध तरीके से समझें।

1. शरदकालीन बुवाई वसंतकालीन बुवाई से 30% अधिक उत्पादन क्यों देती है?

शरद ऋतु (सितंबर-अक्टूबर) में वातावरण का तापमान 25°C से 32°C के बीच रहता है, जो गन्ने की आंख (Bud) के अंकुरण और प्रारंभिक वानस्पतिक विकास के लिए प्राकृतिक रूप से सर्वोत्तम माना जाता है:

  1. लंबा विकास काल (Extended Vegetative Period): शरदकालीन गन्ने को खेत में बढ़ने के लिए पूरे 12 से 14 महीने का समय मिलता है, जबकि वसंतकालीन गन्ने को केवल 8 से 9 महीने मिलते हैं।
  2. कल्लों (Tillers) की भारी संख्या: अक्टूबर-नवंबर में जमाव के बाद प्रत्येक पौधे से 8 से 12 स्वस्थ कल्ले फूटते हैं, जो अगले साल मार्च आते-आते सभी मोटे और वजनदार गन्ने में परिवर्तित हो जाते हैं।
  3. अधिक चीनी परता (Higher Sugar Recovery): लंबी अवधि तक धूप मिलने से गन्ने में सुक्रोज की मात्रा (Sucrose Content) 1.5% से 2% अधिक बनती है, जिससे मिलों से सर्वोत्तम रिकवरी प्राप्त होती है।
  4. गन्ने का वजन और लंबाई: वसंतकालीन गन्ने की औसत लंबाई जहां 8-10 फीट और वजन 1.2 से 1.5 किग्रा होता है, वहीं ट्रेंच विधि के शरदकालीन गन्ने की लंबाई 12-15 फीट और वजन 2.0 से 2.5 किग्रा प्रति गन्ना तक पहुंच जाता है।
  5. गिरने से बचाव (Lodging Resistance): ट्रेंच विधि में गन्ना 30 सेमी गहरी नाली में बोया जाता है और जून-जुलाई में मिट्टी चढ़ा दी जाती है, जिससे तेज आंधी और भारी बारिश में भी गन्ना कभी नहीं गिरता।

2. खेत की तैयारी और ट्रेंच (नाली) बनाने का सटीक गणित

600 क्विंटल प्रति एकड़ की रिकॉर्ड पैदावार के लिए खेत की गहरी जुताई और सटीक नाली निर्माण सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है:

[गहरी जुताई (MB Plough)] ➔ [2 बार रोटावेटर/कल्टीवेटर] ➔ [ट्रेंच ओपनर से 4.5 फीट दूरी पर नाली] ➔ [30 सेमी गहरी व 30 सेमी चौड़ी ट्रेंच]

खेत तैयार करने की विधि:

  • गहरी जुताई (Deep Tillage): खेत में 1 बार मिट्टी पलटने वाले हल (MB Plough) या सबसॉयलर (Subsoiler) से 1.5 फीट गहरी जुताई करें ताकि नीचे की सख्त परत (Hard Pan) टूट जाए और जड़ें गहराई तक जा सकें।
  • गोबर की खाद या प्रेसमड: जुताई के समय खेत में प्रति एकड़ 4 से 5 ट्रॉली अच्छी सड़ी हुई देशी गोबर की खाद (FYM) या 3 ट्रॉली कम्पोस्ट प्रेसमड (Maili) समान रूप से बिखेरें।
  • ट्रेंच निर्माण (Trench Specifications):
    • लाइन से लाइन की दूरी (Row-to-Row Distance): 4.5 फीट (135 सेमी) से 5 फीट (150 सेमी)।
    • ट्रेंच की गहराई (Depth): 25 से 30 सेंटीमीटर (10-12 इंच)।
    • ट्रेंच की चौड़ाई (Trench Width): नीचे से 30 सेमी (1 फीट) सपाट।
    • नाली की दिशा: यदि संभव हो तो नाली उत्तर से दक्षिण (North to South) दिशा में बनाएं, जिससे दिन भर गन्ने की दोनों कतारों को समान रूप से सूर्य का प्रकाश मिल सके।

3. बीज चयन, कटाई और अनिवार्य बीज शोधन (Seed Treatment)

उत्पादन में 50% योगदान उच्च गुणवत्ता वाले निरोगी बीज का होता है। शरदकालीन बुवाई के लिए हमेशा 8 से 9 माह पुराना, निरोगी और मोटा बीज ही चुनें:

(क) उत्कृष्ट किस्मों का चयन:

  • अगेती किस्में: CoS 13235, CoLk 14201, Co 15023, Co 0118 या CoPb 95।
  • (ध्यान रहे: लाल सड़न रोग ग्रसित Co 0238 की बुवाई से पूर्णतः बचें)।

(ख) सिंगल बड या डबल बड कटाई:

  • सिंगल बड (Single Bud Setts): एक आंख वाले टुकड़ों की कटाई करें। एक एकड़ के लिए लगभग 15 से 18 क्विंटल बीज पर्याप्त होता है।
  • डबल बड (Two Bud Setts): दो आंख वाले टुकड़ों की कटाई करें। एक एकड़ के लिए 25 से 28 क्विंटल बीज लगता है।

(ग) बीज शोधन का 100% असरदार घोल:

बीज के टुकड़ों को बुवाई से पूर्व निम्नलिखित घोल में 15 से 20 मिनट तक डुबोकर उपचारित करें:

  • पानी: 100 लीटर
  • फफूंदनाशक: 200 ग्राम कार्बेन्डाजिम 50% डब्ल्यूपी (Bavistin) अथवा 250 ग्राम थायोफैनेट मिथाइल
  • कीटनाशक: 200 मिली इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एसएल (दीमक व सफेद लट से बचाव हेतु)
  • जैव-उर्वरक (वैकल्पिक): 500 मिली ट्राइकोडर्मा विरिडी लिक्विड

4. बुवाई के समय संतुलित खाद एवं उर्वरक प्रबंधन (Fertilizer Chart per Acre)

ट्रेंच विधि में खाद को पूरे खेत में बिखेरने (Broadcasting) के बजाय केवल ट्रेंच की तली में गन्ने के टुकड़ों के नीचे या पास में दिया जाता है, जिससे पौधों को 100% पोषण मिलता है और खरपतवारों को खाद नहीं मिलती:

उर्वरक का नामबेसल डोज (बुवाई के समय प्रति एकड़)देने का सही तरीका
डीएपी (DAP)50 किलोग्राम (1 बोरी)ट्रेंच की तली में मिट्टी में मिलाकर डालें
म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP)35 किलोग्रामपोटाश गन्ने की मोटाई और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
यूरिया (Urea)25 किलोग्राम (आधी बोरी)प्रारंभिक वानस्पतिक वृद्धि हेतु
जिंक सल्फेट (Zinc 33% Monohydrate)5 किलोग्रामक्लोरोफिल और पत्ती की चौड़ाई बढ़ाने हेतु
फेरस सल्फेट (Iron)10 किलोग्रामतराई और क्षारीय मिट्टी में पीलापन रोकने हेतु
दानेदार कीटनाशक (Fipronil 0.3% GR)8 से 10 किलोग्रामगन्ने की आंख को दीमक और कंसुआ से बचाने हेतु
[ट्रेंच तली में बेसल खाद डालें] ➔ [उपचारित बीज 1-1 फीट दूरी पर बिछाएं] ➔ [ऊपर से 2-3 इंच भुरभुरी मिट्टी की परत चढ़ाएं] ➔ [हल्की सिंचाई लगाएं]

5. 600 क्विंटल प्रति एकड़ का गणितीय उत्पादन फॉर्मूला

आइए समझें कि ट्रेंच विधि से 600 क्विंटल का आंकड़ा वैज्ञानिक रूप से कैसे हासिल होता है:

$$\text{कुल उत्पादन (क्विंटल)} = \frac{\text{प्रति एकड़ गन्नों की कुल संख्या} \times \text{एक गन्ने का औसत वजन (किग्रा)}}{100}$$

  1. प्रति एकड़ ट्रेंच की कुल लंबाई: 4.5 फीट की दूरी पर 1 एकड़ (4,000 वर्ग मीटर) में लगभग 9,000 रनिंग फीट नाली बनती है।
  2. प्रति फीट स्वस्थ गन्नों की संख्या: उचित कल्ले फूटने के बाद प्रति रनिंग फीट पर औसतन 3 से 4 स्वस्थ गन्ने तैयार होते हैं।
  3. प्रति एकड़ कुल परिपक्व गन्ने (Millable Canes): $9000 \text{ फीट} \times 3.5 \text{ गन्ना/फीट} = 31,500 \text{ गन्ने}$।
  4. शरदकालीन गन्ने का औसत वजन: 12-14 महीने की वृद्धि के बाद एक गन्ने का वजन $1.9 \text{ से } 2.1 \text{ किग्रा}$ होता है।
  5. अंतिम उत्पादन गणना: $$\text{उत्पादन} = \frac{31,500 \times 2.0 \text{ किग्रा}}{100} = \mathbf{630 \text{ क्विंटल प्रति एकड़}}$$

यह कोई काल्पनिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर और शामली के सैकड़ों प्रगतिशील किसान प्रतिवर्ष इस फॉर्मूले से 600 से 650 क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार ले रहे हैं।

6. सिंचाई, मिट्टी चढ़ाना (Earthing Up) और बंधाई प्रबंधन

  • प्रथम सिंचाई: बुवाई के तुरंत बाद ट्रेंच में बहुत हल्का पानी (केवल 2-3 इंच) लगाएं ताकि गन्ने के टुकड़े तैरें नहीं और मिट्टी बहकर न हटे।
  • अंधी गुड़ाई (Blind Hoeing): बुवाई के 8-10 दिन बाद जब ओट (Moisture condition) आ जाए, तो खुरपी या हल्के कल्टीवेटर से नाली की ऊपरी पपड़ी तोड़ दें, जिससे 100% अंकुरण बाहर निकल सके।
  • मिट्टी चढ़ाना (Earthing Up in May-June):
    • पहली हल्की मिट्टी (मई माह): जब कल्ले 5-6 हो जाएं, तो नाली को आधा भर दें।
    • दूसरी भारी मिट्टी (जून अंतिम सप्ताह - मॉनसून पूर्व): ट्रेंच की नाली को पूरी तरह भरकर गन्ने की लाइन पर 15-20 सेमी ऊंची मेड़ बना दें और जो बीच की खाली जगह थी वह अब पानी की नाली बन जाएगी।
  • गन्ने की कैंची बंधाई (Trashing & Tying): अगस्त माह में जब गन्ने की लंबाई 10-12 फीट हो जाए, तो आमने-सामने की दो लाइनों के गन्नों को मिलाकर सूखी पत्तियों से ‘कैंचीनुमा बंधाई (Cross Tying)’ कर दें। इससे हवा का दबाव बंट जाता है और गन्ना कभी जमीन पर नहीं गिरता।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Top 10 FAQs)

शरदकालीन गन्ना बुवाई का सबसे उपयुक्त समय कौन सा है?

उत्तर प्रदेश में शरदकालीन गन्ने की बुवाई का सर्वोत्तम समय 15 सितंबर से 25 अक्टूबर तक होता है। इस दौरान तापमान अंकुरण के लिए आदर्श रहता है।

ट्रेंच विधि में लाइन से लाइन की दूरी कितनी रखनी चाहिए?

ट्रेंच विधि में लाइन से लाइन की दूरी न्यूनतम 4 फीट और अधिकतम 5 फीट (120 से 150 सेमी) रखनी चाहिए ताकि सह-फसलें आसानी से ली जा सकें।

एक एकड़ में कितने क्विंटल गन्ने के बीज की आवश्यकता होती है?

सिंगल बड (एक आंख) विधि से बोने पर मात्र 15 से 18 क्विंटल और डबल बड (दो आंख) से बोने पर 25 से 28 क्विंटल बीज प्रति एकड़ लगता है।

गन्ने के टुकड़ों पर कितनी मिट्टी डालनी चाहिए?

नाली में गन्ने के टुकड़ों के ऊपर केवल 2 से 3 इंच (5 से 7 सेमी) भुरभुरी मिट्टी की परत डालनी चाहिए। अधिक गहरी मिट्टी दबाने से आंखें सड़ जाती हैं।

शरदकालीन गन्ने के साथ कौन सी सह-फसल सबसे अधिक लाभ देती है?

गन्ने के साथ आलू (कुफरी पुखराज/ख्याति), पीली सरसों, पत्तागोभी, लहसुन और मटर की सह-फसल सबसे अधिक मुनाफा देती है।

क्या ट्रेंच विधि में ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) लगाई जा सकती है?

हां, 4.5 से 5 फीट की दूरी ड्रिप इरिगेशन के लिए सबसे आदर्श है। ड्रिप लगाने से 50% पानी और 30% खाद की बचत होती है।

कंसुआ (Early Shoot Borer) से बचाव के लिए बुवाई पर क्या डालें?

बुवाई के समय नाली में फिप्रोनिल 0.3% जीआर 10 किग्रा/एकड़ डालें अथवा बुवाई के 35 दिन बाद कोराजन (क्लोरेंट्रानिलीप्रोल) का ड्रेंचिंग करें।

क्या शरदकालीन गन्ने की पेड़ी (Ratoon) भी अच्छी होती है?

हां, शरदकालीन गन्ने की जड़ें बहुत मजबूत और गहरी होती हैं, जिससे इसकी पहली और दूसरी पेड़ी में भी 450 से 500 क्विंटल प्रति एकड़ की पैदावार मिलती है।

ट्रेंच नाली बनाने के लिए कौन सा कृषि यंत्र सबसे अच्छा है?

ट्रैक्टर चालित ‘डबल रो ट्रेंच ओपनर’ या ‘एडजस्टेबल सुगरकेन रिजर’ नाली बनाने के लिए सबसे उपयुक्त यंत्र है जिस पर 50% तक सरकारी सब्सिडी मिलती है।

यदि अक्टूबर में भारी बारिश हो जाए तो बुवाई कैसे करें?

खेत में जलभराव न होने दें, ट्रेंच नालियों से पानी निकासी की व्यवस्था करें और मिट्टी में पर्याप्त ओट आने के बाद ही बुवाई करें।


📞 महत्वपूर्ण हेल्पलाइन और संपर्क सूत्र

  • उत्तर प्रदेश गन्ना किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-121-3203
  • गन्ना आयुक्त मुख्यालय लखनऊ कंट्रोल रूम: 0522-2236403
  • ई-गन्ना ऐप एवं सट्टा पोर्टल: enquiry.caneup.in
  • विभागीय पोर्टल: upcane.gov.in

8. ट्रेंच विधि में सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) और जल प्रबंधन की विशेष तकनीक

ट्रेंच विधि में गन्ने की प्रति एकड़ 600 क्विंटल से अधिक उपज प्राप्त करने के लिए केवल डीएपी और यूरिया पर्याप्त नहीं होता, बल्कि गन्ने की जड़ों के विकास और गूलों में जल निकासी का विशेष ध्यान रखना पड़ता है:

(क) सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित संयोजन (प्रति एकड़):

  • जिंक सल्फेट (Zinc Sulphate 33%): 5 किग्रा प्रति एकड़। बुवाई के समय कतारों में डालने से गन्ने के पोरों की लंबाई और मोटाई तेजी से बढ़ती है।
  • फेरस सल्फेट (Ferrous Sulphate 19%): 10 किग्रा प्रति एकड़। विशेषकर क्षारीय व रेतीली दोमट मिट्टी में क्लोरोसिस (पत्तियों का पीला पड़ना) रोकता है।
  • बेंटोनाइट सल्फर (Sulphur 90% Granular): 10 किग्रा प्रति एकड़। यह गन्ने में शर्करा (Sucrose Content) को 0.5% से 1% तक बढ़ाता है और मिट्टी का पीएच संतुलित करता है।

(ख) ट्रेंच गूलों में सिंचाई की ‘अल्टरनेट फरो’ (Alternate Furrow) विधि:

  1. पानी की 40% बचत: ट्रेंच विधि में पूरे खेत को एक साथ पानी से नहीं भरा जाता। केवल उन नालियों में पानी प्रवाहित किया जाता है जिनमें गन्ना बोया गया है।
  2. जड़ श्वसन (Root Aeration): गूलों के बीच की 4 से 5 फीट की सूखी उठी हुई मेड़ें हवादार बनी रहती हैं, जिससे सूक्ष्म जीवाणुओं (Azotobacter और PSB) की सक्रियता 3 गुना बढ़ जाती है।
  3. सिंचाई अंतराल सारणी:
    • शरद ऋतु (अक्टूबर - नवंबर): 20 से 25 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई।
    • शीत ऋतु (दिसंबर - जनवरी): 30 से 35 दिन के अंतराल पर पाला रोधी हल्की सिंचाई।
    • ग्रीष्म ऋतु (मार्च - जून): 10 से 12 दिन के अंतराल पर नियमित सिंचाई।

🌾 CaneUp किसान सहायता पोर्टल

अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें

गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।

1 जिला व मिल चुनें
2 गांव व नाम डालें
3 समस्या लिखकर भेजें
उत्तर प्रदेश का अपना जनपद चुनें
आपके जिले से संबंधित चीनी मिलें
इस नंबर पर आपको पर्ची और भुगतान के व्हाट्सएप अपडेट्स मिलेंगे
जितना स्पष्ट लिखेंगे, उतनी जल्दी सटीक समाधान मिलेगा

🔒 आपकी निजी जानकारी 100% सुरक्षित है। हम कोई स्पैम नहीं भेजते। केवल आपकी मिल से जुड़े आधिकारिक अपडेट्स शेयर किए जाते हैं।

✓
Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

यह आर्टिकल कैसा लगा?

📬 गन्ना अपडेट पाएं

MSP रेट, पर्ची कैलेंडर, सरकारी योजनाएं — सीधे आपके इनबॉक्स में