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शरदकालीन गन्ना बुवाई ट्रेंच विधि 2026 — 4.5 फीट दूरी, सरसों-आलू सह-फसल से ₹30,000 अतिरिक्त आय

Aamir Raza Aamir Raza • Aug 31, 2026 • 4 min read
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शरदकालीन गन्ना बुवाई ट्रेंच विधि 2026 — 4.5 फीट दूरी, सरसों-आलू सह-फसल से ₹30,000 अतिरिक्त आय
अंतिम अपडेट: August 31, 2026 10:30 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में 15 सितंबर से 31 अक्टूबर तक का समय शरदकालीन गन्ना बुवाई (Autumn Planting) के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। बसंतकालीन बुवाई (फरवरी-मार्च) की तुलना में शरद ऋतु में बोया गया गन्ना 15 से 20 प्रतिशत अधिक पैदावार देता है, क्योंकि इसे वानस्पतिक बढ़वार के लिए 4 महीने का अतिरिक्त समय मिल जाता है।

यदि शरद बुवाई को पारंपरिक संकरी नालियों के बजाय 4.5 से 5 फीट चौड़ी ट्रेंच विधि (Trench Method) और सरसों या आलू की सह-फसल (Intercropping) के साथ किया जाए, तो किसान गन्ने की बंपर 500+ कुंतल पैदावार के साथ-साथ सह-फसल से प्रति एकड़ ₹25,000 से ₹35,000 की शुद्ध अतिरिक्त कमाई पहले 90 दिनों में ही हासिल कर सकते हैं।


1. ट्रेंच विधि से गन्ना बुवाई का वैज्ञानिक फॉर्मूला

पारंपरिक विधि में कतार से कतार की दूरी मात्र 2 से 2.5 फीट होती है, जिससे पौधों को पर्याप्त धूप और हवा नहीं मिलती। ट्रेंच विधि के मुख्य चरण निम्नलिखित हैं:

कतार से कतार की दूरी: 4.5 से 5 फीट

ट्रेंच ओपनर या मॉडिफाइड रिजर की मदद से 4.5 से 5 फीट की दूरी पर 25 से 30 सेंटीमीटर गहरी और 30 सेंटीमीटर चौड़ी नालियां (ट्रेंच) तैयार करें।

सिंगल बड या टू-बड टुकड़ों का प्रयोग

गन्ने के केवल ऊपरी एक-तिहाई भाग के स्वस्थ गूलों (टुकड़ों) का चयन करें। नालियों के अंदर गन्ने के टुकड़ों को सिरा-से-सिरा मिलाकर (End to End) रखें। एक एकड़ में लगभग 22 से 25 कुंतल बीज पर्याप्त होता है (पारंपरिक विधि के 35 कुंतल की तुलना में 30% बीज की बचत)।

2 इंच मिट्टी से ढकना

नाली में रखे गन्ने के ऊपर केवल 2 से 2.5 इंच (5 सेमी) भुरभुरी मिट्टी डालें और हल्का पानी (हल्की सिंचाई) नालियों में चलाएं। नालियों के बीच की ऊंची मेड़ सूखी रहेगी।


2. सरसों और आलू की सह-फसल (Intercropping Model)

ट्रेंच विधि में कतारों के बीच 4.5 फीट का जो खुला स्थान रहता है, उसका उपयोग सह-फसलों के लिए किया जाता है:

सह-फसल (Intercrop)उपयुक्त किस्मेंबुवाई की विधि व समयप्रति एकड़ अतिरिक्त उत्पादनशुद्ध अतिरिक्त आमदनी (₹)
पीली / काली सरसोंपूसा मस्टर्ड-28, एनआरसीएचबी-101ट्रेंच के बीच मेड़ पर 1 कतार5 से 7 कुंतल₹28,000 से ₹35,000
अगेती आलूकुफरी पुखराज, कुफरी ख्यातिमेड़ पर 1 या 2 कतारें (अक्टूबर)70 से 90 कुंतल₹35,000 से ₹45,000
शरदकालीन मटरपूसा प्रगति, काशी नंदिनीमेड़ पर 2 कतारें25 से 30 कुंतल (हरी फली)₹30,000 से ₹40,000
लहसुन / धनियायमुना सफेद (G-1), पंत हरितमामेड़ की दोनों किनारों परस्थानीय बाजार मांग अनुसार₹20,000 से ₹30,000

सह-फसल से गन्ने को क्या लाभ मिलता है?

  • खरपतवार नियंत्रण: सह-फसल की पत्तियां मेड़ों को ढक लेती हैं, जिससे खरपतवार उगने का अवसर नहीं मिलता और लेबर खर्च 60% घट जाता है।
  • नाइट्रोजन फिक्सेशन: मटर या सरसों के अवशेष गलकर खेत में जैविक खाद बनते हैं, जिससे गन्ने को अतिरिक्त यूरिया की आवश्यकता नहीं पड़ती।
  • लागत की भरपाई: सह-फसल की बिक्री से 90 दिनों में जो पैसा आता है, उससे गन्ने की खाद, पानी और बीज की पूरी लागत निकल आती है और मुख्य गन्ना पूरी तरह मुनाफा बन जाता है।

3. खाद एवं उर्वरक प्रबंधन तालिका (प्रति एकड़)

बुवाई के समय ट्रेंच की नालियों में निम्नलिखित उर्वरकों का प्रयोग करें:

  • गोबर की सड़ी खाद (FYM): 4 से 5 ट्रॉली (ट्राइकोडर्मा 2.5 किग्रा मिला हुआ)
  • डीएपी (DAP): 1.5 बोरी (75 किग्रा)
  • म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP): 1 बोरी (50 किग्रा)
  • जिंक सल्फेट (33%): 5 किग्रा
  • यूरिया (Urea): बुवाई पर आधा बोरा, शेष दो बार में कल्ले फूटते समय

सिंचाई व ड्रिप सब्सिडी की जानकारी के लिए ड्रिप सिंचाई 90% सब्सिडी गाइड देखें और उन्नत बीजों के लिए Co-15023 व CoS-17231 की विशेषताएं पढ़ें।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) — शरदकालीन ट्रेंच बुवाई

Q1. क्या ट्रेंच विधि में साधारण ट्रैक्टर से जुताई हो सकती है?

उत्तर: हाँ, 4.5 से 5 फीट की दूरी होने के कारण कतारों के बीच छोटा मिनी ट्रैक्टर (18-24 HP) आसानी से चलकर निराई-गुड़ाई और मिट्टी चढ़ाने का काम कर सकता है।

Q2. गन्ने के साथ सरसों बोने से क्या गन्ने की बढ़वार रुकती है?

उत्तर: नहीं, क्योंकि गन्ने की प्राथमिक बढ़वार धीमी होती है और सरसों 90 दिनों में कट जाती है, जिससे गन्ने को पूरा खुला स्थान और धूप मिलने लगती है।

Q3. ट्रेंच विधि में सिंचाई का पानी कितना बचता है?

उत्तर: पारंपरिक पूरे खेत में पानी भरने की तुलना में केवल नालियों में पानी देने से 50% से 60% पानी और बिजली की बचत होती है।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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