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गन्ने में टॉप बोरर व कंसुआ की अचूक दवा: कोराजन ड्रेंचिंग विधि व डोज 2026 — क्लोरेंट्रानिलीप्रोल का सही तरीका

Aamir Raza Aamir Raza • Sep 1, 2026 • अपडेट: Sep 5, 2026 10:00 AM IST • 10 min read
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गन्ने में टॉप बोरर व कंसुआ की अचूक दवा: कोराजन ड्रेंचिंग विधि व डोज 2026 — क्लोरेंट्रानिलीप्रोल का सही तरीका
अंतिम अपडेट: September 5, 2026 10:00 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मुख्य बिंदु (Quick Summary): गन्ने में चोटी बेधक (Top Borer) की तीसरी व चौथी पीढ़ी फसल की बढ़वार रोक देती है। जानिए कोराजन 150 मिली प्रति एकड़ की जड़ों के पास ड्रेंचिंग का सही समय और 90 दिनों की गारंटीड सुरक्षा।

उत्तर प्रदेश के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में लाल सड़न (Red Rot) के बाद किसानों को सबसे अधिक आर्थिक क्षति पहुंचाने वाला शत्रु चोटी बेधक कीट (Top Borer / Scirpophaga excerptalis) और प्रारंभिक अवस्था का कंसुआ कीट (Early Shoot Borer / Chilo infuscatellus) है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मुजफ्फरनगर, मेरठ, शामली, बागपत, बिजनौर, सहारनपुर) से लेकर तराई व मध्य यूपी के जिलों में प्रतिवर्ष मई से लेकर सितंबर माह के बीच इस कीट की लगातार 5 पीढ़ियां (Broods) सक्रिय होती हैं।

जब टॉप बोरर की इल्ली (Caterpillar) गन्ने की गोभ (Growing Point) के अंदर घुसकर मुख्य नस को काट देती है, तो पौधे का शीर्ष भाग सूख जाता है जिसे किसान की भाषा में ‘डेड हार्ट (Dead Heart)’ या ‘बुंदी कटना’ कहते हैं। इसके बाद गन्ने की ऊपर की गांठों से कई छोटे-छोटे पतले कल्ले निकलने लगते हैं जिसे ‘झाड़ीदार अगोला (Bunchy Top)’ कहा जाता है। इससे गन्ने की लंबाई बढ़ना हमेशा के लिए रुक जाती है, वजन 30% से 40% तक घट जाता है और चीनी परता गिर जाती है।

इस वैज्ञानिक मार्गदर्शिका में हम एफएमसी कोराजन (Coragen / Chlorantraniliprole 18.5% SC) तथा अन्य आधुनिक कीटनाशकों के माध्यम से कंसुआ और टॉप बोरर की रोकथाम का 100% असरदार ड्रेंचिंग फॉर्मूला, सही समय चक्र, नोजल सेटिंग और खेत में नमी प्रबंधन को विस्तार से समझेंगे।

1. टॉप बोरर व कंसुआ कीट की पहचान और 5 पीढ़ियों का जीवन चक्र

कीट के हमले से पहले उसके जीवन चक्र और आक्रमण के समय को समझना सफल नियंत्रण की पहली कुंजी है:

कीट का नाम व पीढ़ीसक्रियता का सटीक माहपौधे पर लक्षण व नुकसानखतरे का स्तर
कंसुआ (Shoot Borer - प्रथम पीढ़ी)अप्रैल से मई (गर्मी का मौसम)छोटे पौधों का डेड हार्ट बनना, खींचने पर आसानी से बाहर आना व सड़ी बदबू🟡 मध्यम (कल्लों की संख्या घटाता है)
टॉप बोरर - द्वितीय पीढ़ी (2nd Brood)मई अंतिम सप्ताह से जूननई पत्तियों में गोली के छर्रे जैसे समानांतर छेद (Shot Holes) दिखाई देना🟡 मध्यम
टॉप बोरर - तृतीय पीढ़ी (3rd Brood - सबसे घातक)25 जून से 15 जुलाई (मॉनसून प्रारंभ)मुख्य गोभ का सूखना, पत्तियों की मध्य शिरा में लाल-काली सुरंग बनना🔴 अति-संवेदनशील (70% नुकसान इसी पीढ़ी से)
टॉप बोरर - चतुर्थ पीढ़ी (4th Brood)10 अगस्त से 31 अगस्तगन्ने के ऊपरी हिस्से में बंची टॉप (झाड़ीदार सिर) बनना, बढ़वार पूर्णतः ठप🔴 भयंकर वजन हानि
टॉप बोरर - पंचम पीढ़ी (5th Brood)सितंबर अंत से अक्टूबरऊपरी पोरियों में इल्लियों का शीतकालीन सुप्तावस्था (Hibernation) में जाना🟡 अगली फसल के लिए खतरा

2. कोराजन (Coragen 18.5% SC) की कार्यप्रणाली — यह 90 दिन तक क्यों सुरक्षित रखता है?

कोराजन का रासायनिक तकनीकी नाम क्लोरेंट्रानिलीप्रोल (Chlorantraniliprole 18.5% SC) है। यह रयानॉडाइन रिसेप्टर एक्टिवेटर्स (Ryanodine Receptor Activator) वर्ग का एक आधुनिक, सुरक्षित और अत्यधिक प्रभावी कीटनाशक है:

  1. सिस्टेमिक अवशोषण (Systemic Root Uptake): जब कोराजन को गन्ने की जड़ों के पास ड्रेंच (Drench) किया जाता है, तो पौधे की जड़ें इसे सोखकर पूरे तने और पत्तियों में पहुंचा देती हैं।
  2. इल्ली का पक्षाघात (Muscle Paralysis): जैसे ही टॉप बोरर की नवजात इल्ली गन्ने की पत्ती या तने को कुतरती है, दवा उसके शरीर में जाकर मांसपेशियों के कैल्शियम चैनल को खोल देती है जिससे इल्ली 2 से 4 घंटे के भीतर लकवाग्रस्त होकर भोजन करना बंद कर देती है और मर जाती है।
  3. दीर्घकालिक 90 दिनों की सुरक्षा: पौधे के ऊतकों में दवा का असर लगभग 80 से 90 दिनों तक बना रहता है, जिससे तृतीय और चतुर्थ दोनों पीढ़ियों के हमले से एक ही उपचार में 100% सुरक्षा मिल जाती है।
  4. मित्र कीटों के लिए सुरक्षित: यह मधुमक्खियों, मकड़ियों और केंचुओं जैसे मित्र कीटों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता।

3. कोराजन ड्रेंचिंग (Root Drenching) की 5-चरणीय सही वैज्ञानिक विधि

किसान अक्सर कोराजन का छिड़काव पत्तियों के ऊपर से कर देते हैं जिससे दवा धूप में उड़ जाती है और पूरा पैसा बर्बाद हो जाता है। कोराजन का 100% रिजल्ट पाने के लिए केवल जड़ों के पास ड्रेंचिंग (Root Drenching) ही एकमात्र प्रमाणित तरीका है:

[खेत में पर्याप्त नमी सुनिश्चित करें] ➔ [150 मिली कोराजन 200-400 लीटर पानी में घोलें] ➔ [स्प्रेयर का नोजल कैप खोलें] ➔ [पौधों की जड़ों पर मोटी धार डालें] ➔ [24 घंटे में हल्की सिंचाई लगाएं]

चरण 1: सही समय का चयन (Perfect Timing):

  • शरदकालीन गन्ने के लिए: मई के अंतिम सप्ताह से जून के प्रथम सप्ताह में।
  • वसंतकालीन गन्ने के लिए: बुवाई के 55 से 65 दिन बाद (लगभग 15 जून से 30 जून के बीच)।

चरण 2: प्रति एकड़ सटीक डोज व पानी का अनुपात:

  • कोराजन की मात्रा: 150 मिलीलीटर प्रति एकड़ (न कम, न ज्यादा)।
  • पानी की मात्रा: कम से कम 200 से 400 लीटर साफ पानी प्रति एकड़ (लगभग 12 से 16 नैपसैक स्प्रेयर टंकी)।

चरण 3: नोजल सेटिंग (Floodjet / Nozzle Modification):

स्प्रेयर की टंकी के आगे लगे स्प्रे नोजल की जाली/कैप को हटा दें ताकि फुहार (Mist) के बजाय दवा की मोटी धार (Solid Stream) निकले। नोजल को गन्ने की लाइन में पौधों की जड़ों के ठीक पास (जमीन से 2 इंच ऊपर) रखते हुए तेजी से चलें।

चरण 4: खेत में नमी व सिंचाई प्रबंधन:

  • ड्रेंचिंग करते समय खेत में मिट्टी में ‘ओट’ (Moisture) होना अति-आवश्यक है। सूखी मिट्टी में कोराजन जड़ों द्वारा अवशोषित नहीं हो पाता।
  • ड्रेंचिंग करने के ठीक 24 से 48 घंटे के भीतर खेत में एक हल्की सिंचाई (Light Irrigation) अवश्य लगाएं ताकि दवा घुलकर जड़ों के सक्रिय जोन (Root Zone) में गहराई तक पहुंच जाए।

4. कोराजन के अन्य आधुनिक विकल्प व कीटनाशक तालिका

यदि किसी कारणवश कोराजन उपलब्ध न हो अथवा आप फसल में कीटनाशक बदलना चाहते हैं, तो निम्नलिखित विकल्प अत्यंत प्रभावी हैं:

रासायनिक संरचनाव्यापारिक नाम व कंपनीप्रति एकड़ सटीक मात्राप्रयोग का तरीका
क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 0.4% GR (दानेदार)फर्टेरा (Ferterra - FMC)7.5 से 8 किलोग्राम प्रति एकड़बुवाई के 45-60 दिन पर जड़ों के पास डालकर मिट्टी से ढकें
फिप्रोनिल 4% + एसिटामिप्रिड 4% SCपुलिस / एरिस (Police - Gharda)400 ग्राम प्रति एकड़200 लीटर पानी में घोलकर जड़ों पर स्प्रे करें
कार्बोफ्यूरान 3% CGफ्युराडान (Furadan)10 से 12 किलोग्राम प्रति एकड़अत्यधिक सावधानीपूर्वक मिट्टी में मिलाएं
कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 4% GRकैल्डान / पाडन (Caldan 4G)8 से 10 किलोग्राम प्रति एकड़कंसुआ और प्रारंभिक बोरर के लिए प्रभावी दानेदार खाद के साथ
थियामेथोक्सम 75% SGएकतारा सुपर (Actara Super)100 से 150 ग्राम प्रति एकड़ड्रेंचिंग द्वारा सफेद मक्खी व बोरर दोनों पर असरदार

5. उत्तर प्रदेश के प्रमुख चीनी मिल क्षेत्रों में कीट निगरानी व लाइट ट्रैप्स

उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर और लखीमपुर खीरी के कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) द्वारा गन्ना खेतों में प्रकाश प्रपंच (Light Traps) और फेरोमोन ट्रैप्स (Pheromone Traps) लगाने की संस्तुति की गई है:

  1. फेरोमोन ट्रैप्स की स्थापना: प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप गन्ने की ऊंचाई से 1 फीट ऊपर लगाएं। इसमें मादा कीट की गंध वाली ल्यूर (Lure) लगी होती है जिससे नर पतंगे आकर्षित होकर ट्रैप में गिर जाते हैं और प्रजनन चक्र टूट जाता है।
  2. जैविक नियंत्रण (Trichogramma Cards): प्रति एकड़ 20,000 ट्राइकोग्रामा चिलोनीज (Trichogramma chilonis) परजीवी कीट के अंडे पत्तियों पर स्टेपल करें। यह मित्र कीट बोरर के अंडों को खाकर नष्ट कर देता है।

6. किसान भाई कोराजन डालते समय ये 6 गलतियां कभी न करें

  1. पत्तियों पर ऊपर से फुहार (Foliar Mist) न मारें: ऊपर से स्प्रे करने पर दवा पत्ती की वैक्स लेयर पर सूख जाती है और जड़ों तक केवल 10% दवा पहुंचती है।
  2. सूखे खेत में प्रयोग से बचें: बिना नमी के कोराजन डालने पर दवा मिट्टी में चिपक कर लॉक हो जाती है और पौधे उसे नहीं पी पाते।
  3. कम पानी का उपयोग: 1 एकड़ में 1-2 टंकी पानी में 150 मिली दवा घोलकर छिड़कना सबसे बड़ी गलती है। 1 एकड़ में न्यूनतम 250-300 लीटर पानी लगना ही चाहिए।
  4. नकली कोराजन से सावधान रहें: बाजार में सस्ते दामों पर कोराजन के नाम पर नकली उत्पाद बेचे जा रहे हैं। हमेशा बोतल पर दिया गया ‘3D होलोग्राम’ और क्यूआर कोड स्कैन करके ओरिजिनल बिल के साथ ही खरीदें।
  5. जुलाई के बाद लेट ड्रेंचिंग न करें: जब गन्ना 8-10 फीट ऊंचा हो जाए और अंदर घुसना नामुमकिन हो, तब ड्रेंचिंग का कोई लाभ नहीं मिलता।
  6. यूरिया के साथ मिलाकर फेंकना: कोराजन तरल दवा को यूरिया में मिलाकर खेत में बिखेरने (Broadcasting) से इसका असर 50% घट जाता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Top 10 FAQs)

कोराजन का 1 एकड़ में कितना डोज डालना चाहिए?

1 एकड़ गन्ने के लिए कोराजन (क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC) की मानक डोज ठीक 150 मिलीलीटर है जिसे 250 से 300 लीटर पानी में घोलकर डाला जाता है।

गन्ने में कोराजन डालने का सबसे सही महीना कौन सा है?

उत्तर प्रदेश में कोराजन ड्रेंचिंग का सर्वोत्तम समय 15 मई से 25 जून के बीच होता है, जब टॉप बोरर की तीसरी पीढ़ी का आक्रमण शुरू होने वाला होता है।

क्या कोराजन के बाद सिंचाई करना जरूरी है?

हां, कोराजन ड्रेंचिंग के 24 से 48 घंटे के भीतर खेत में हल्की सिंचाई करना अनिवार्य है ताकि दवा घुलकर जड़ों में सक्रिय हो सके।

क्या कोराजन से सफेद लट (White Grub) और दीमक भी मरती है?

कोराजन मुख्य रूप से सभी प्रकार की इल्लियों (बोरर्स) पर काम करता है। दीमक और सफेद लट के लिए इमिडाक्लोप्रिड या फिप्रोनिल अधिक प्रभावी है।

कोराजन का असर फसल में कितने दिनों तक रहता है?

सही तरीके से जड़ों के पास ड्रेंचिंग करने पर कोराजन का असर पौधे में 75 से 90 दिनों तक लगातार बना रहता है।

क्या कोराजन को फर्टेरा (Ferterra) दानेदार से बदला जा सकता है?

हां, फर्टेरा (7.5 किग्रा/एकड़) में वही टेक्निकल (0.4% GR) होता है जिसे मिट्टी में डालकर सिंचाई की जा सकती है।

झाड़ीदार अगोला (Bunchy Top) दिखने के बाद क्या कोराजन काम करेगा?

बंची टॉप बनने का मतलब है कि इल्ली अंदर नुकसान कर चुकी है। इस समय कोराजन अगली नई पीढ़ियों को रोकेगा लेकिन प्रभावित गन्ने की लंबाई नहीं बढ़ेगी।

क्या कोराजन को किसी फंगीसाइड या टॉनिक के साथ मिला सकते हैं?

हां, कोराजन को बाविस्टिन, साफ फंगीसाइड या ह्यूमिक एसिड के साथ मिलाकर आसानी से ड्रेंच किया जा सकता है।

असली कोराजन की पहचान कैसे करें?

FMC कोराजन की मूल बोतल पर हरा कैप, क्यूआर कोड और उभरा हुआ कंपनी लोगो होता है जिसे ‘FMC Verify’ ऐप से स्कैन किया जा सकता है।

क्या ड्रोन से कोराजन का स्प्रे किया जा सकता है?

ड्रोन से केवल पर्णीय कीटनाशकों का स्प्रे अच्छा होता है। कोराजन चूंकि रूट सिस्टेमिक है, अतः जड़ों के पास ड्रेंचिंग ही सर्वोत्तम परिणाम देती है।


📞 महत्वपूर्ण हेल्पलाइन और संपर्क सूत्र

  • उत्तर प्रदेश गन्ना किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-121-3203
  • गन्ना आयुक्त मुख्यालय लखनऊ कंट्रोल रूम: 0522-2236403
  • ई-गन्ना ऐप एवं सट्टा पोर्टल: enquiry.caneup.in
  • विभागीय पोर्टल: upcane.gov.in

8. टॉप बोरर की पांचों पीढ़ियों (Broods) का जीवन चक्र और नियंत्रण कैलेंडर

टॉप बोरर (Scirpophaga excerptalis) का प्रकोप एक बार में नहीं होता, बल्कि यह पूरे वर्ष 5 अलग-अलग पीढ़ियों में गन्ने पर हमला करता है। प्रत्येक पीढ़ी के सटीक समय की पहचान करके ही किसान 100% सुरक्षा पा सकते हैं:

[फरवरी-मार्च: 1st Brood] -> [अप्रैल-मई: 2nd Brood] -> [जून-जुलाई: 3rd Brood (सबसे घातक)] -> [अगस्त: 4th Brood] -> [सितंबर-अक्टूबर: 5th Brood]
  1. प्रथम पीढ़ी (फरवरी - मार्च): सर्दियों के बाद पतंगे बाहर निकलते हैं और पेड़ी गन्ने की निचली पत्तियों पर अंडे देते हैं। इस समय सूंडी केवल पत्तियों की मध्य शिरा को कुतरती है।
  2. द्वितीय पीढ़ी (अप्रैल - मई): बढ़वार शुरू होते ही कंसुआ (Early Shoot Borer) के साथ मिलकर मृत गोभ (Dead Heart) बनाती है, जिसे खींचने पर सड़ी बदबू आती है।
  3. तृतीय पीढ़ी (मध्य जून - जुलाई): यह सबसे विनाशकारी पीढ़ी होती है। जब गन्ने में पोरी बनना शुरू होती है, तब यह सीधे अगोले के शीर्ष भाग में घुसकर गन्ने की मुख्य बढ़वार रोक देती है, जिससे ‘गुच्छेदार शीर्ष’ (Bunchy Top) बन जाता है।
  4. चतुर्थ एवं पंचम पीढ़ी (अगस्त - अक्टूबर): इस समय गन्ना 8 से 10 फीट ऊंचा हो चुका होता है। इस अवस्था में ड्रोन या हाई-ट्री बूम स्प्रेयर द्वारा एमामेक्टिन बेंजोएट (Emamectin Benzoate 5% SG) 100 ग्राम प्रति एकड़ या क्लोरेंट्रानिलिप्रोल (Coragen) का ड्रेंचिंग स्प्रे सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

मित्र कीटों द्वारा जैविक नियंत्रण (Trichogramma Cards):

  • प्रति एकड़ ट्राइकोग्रामा चिलोनीस (Trichogramma chilonis) के 20,000 से 25,000 परजीवी अंडों वाले ट्राइको-कार्ड खेत में पत्तियों की निचली सतह पर स्टेपल करें।
  • यह मित्र कीट टॉप बोरर के अंडों को सूंघकर नष्ट कर देता है, जिससे बिना किसी रासायनिक जहर के 75% तक प्राकृतिक रोकथाम हो जाती है।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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