
उत्तर प्रदेश के 48 लाख से अधिक गन्ना आपूर्ति कर्ताओं के बीच हर साल सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहता है — “बेसिक कोटा” (Basic Quota)। जब किसान भाई enquiry.caneup.in या eGanna App पर अपना डेटा देखते हैं, तो वहां सबसे ऊपर ‘बेसिक कोटा (कुंतल में)’ लिखा नजर आता है।
अधिकांश किसान यह सोचते हैं कि जितना गन्ना उनके खेत में खड़ा है, मिल को उतनी ही पर्चियां देनी चाहिए। लेकिन उत्तर प्रदेश गन्ना आयुक्त की वैधानिक व्यवस्था ऐसी नहीं है। खेत में खड़ा गन्ना ‘अनुमानित उत्पादन’ (Estimated Yield) कहलाता है, जबकि मिल को बेचे जाने वाले गन्ने की सीमा आपके ‘बेसिक कोटे’ से बंधी होती है (Bounding Rules)।
यदि आप इस गणित को समझ लें, तो आप हर साल अपने बेसिक कोटे में 20% से 50% तक की कानूनी वृद्धि कर सकते हैं। आइए समझते हैं कि बेसिक कोटा कैसे निकाला जाता है और इसे बढ़ाने के 5 वैध नियम कौन से हैं।
🧮 बेसिक कोटा निर्धारण का आधिकारिक फॉर्मूला (Official Calculation)
उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम के तहत बेसिक कोटा किसी एक साल की पैदावार पर नहीं, बल्कि पिछले तीन पेराई सत्रों की वास्तविक आपूर्ति के औसत पर तय होता है:
$$ ext{बेसिक कोटा} = rac{ ext{वर्ष 1 की आपूर्ति} + ext{वर्ष 2 की आपूर्ति} + ext{वर्ष 3 की आपूर्ति}}{3}$$
📊 उदाहरण से समझें:
मान लीजिए मुजफ्फरनगर के किसान रोहताश कुमार ने पिछले तीन वर्षों में मिल को निम्नलिखित गन्ना सप्लाई किया:
- पेराई सत्र 2023-24 में सप्लाई: 240 क्विंटल
- पेराई सत्र 2024-25 में सप्लाई: 300 क्विंटल
- पेराई सत्र 2025-26 में सप्लाई: 360 क्विंटल
अब सत्र 2026-27 के लिए रोहताश कुमार का बेसिक कोटा होगा: $$ ext{बेसिक कोटा} = rac{240 + 300 + 360}{3} = rac{900}{3} = \mathbf{300 ext{ क्विंटल}}$$
[!NOTE] यदि किसी वर्ष बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या मिल के जल्दी बंद हो जाने के कारण किसान गन्ना नहीं डाल पाया, तो किसान के अनुरोध पर उस खराब वर्ष को छोड़कर शेष दो वर्षों का औसत निकाला जाता है। इसे ‘प्राकृतिक आपदा राहत नियम’ (Calamity Clause) कहते हैं।
📜 85% आपूर्ति नियम क्या है? (The 85% Supply Rule Explained)
गन्ना आपूर्ति नीति का सबसे कड़ा और निर्णायक नियम है — 85% आपूर्ति अनिवार्यता।
- कोटा सुरक्षित रखने की शर्त: यदि किसी किसान का बेसिक कोटा 300 क्विंटल है, तो उसे अपने कोटे की कम से कम 85% मात्रा (यानी 255 क्विंटल) मिल को अवश्य सप्लाई करनी होगी।
- दंड (Penalty for Under-supply): यदि किसान ने 85% से कम गन्ना डाला (मान लीजिए केवल 150 क्विंटल डाला और बाकी गन्ना कोल्हू या क्रशर पर औने-पौने दाम पर बेच दिया), तो अगले सत्र में उसका बेसिक कोटा घटाकर (Slash) उस कम सप्लाई के बराबर कर दिया जाएगा।
- लाभ (Reward for 85%+ Supply): जो किसान अपने बेसिक कोटे का 85% या उससे अधिक गन्ना नियमित रूप से मिल को डालते हैं, वे आगामी सत्र में अतिरिक्त सट्टा बाउंडिंग (Extra Bounding Quota) पाने के हकदार बन जाते हैं।
🚀 बेसिक कोटा बढ़ाने के 5 वैध व कानूनी तरीके
यदि आपका बेसिक कोटा कम है और खेत में गन्ना अधिक है, तो इन 5 तरीकों से आप अपना कोटा बढ़वा सकते हैं:
1. अतिरिक्त सट्टा नीति (Extra Satta Bounding Clause)
यदि आपका सर्वे रकबा अधिक है और बेसिक कोटा कम है, तो चीनी मिलें मुख्य कैलेंडर समाप्त होने के बाद अतिरिक्त पर्चियां (Free / Extra Indent) जारी करती हैं। जब भी मिल में गन्ने की कमी हो, तो मिल गेट पर अतिरिक्त गन्ने की तौल कराएं। अतिरिक्त तौला गया गन्ना आपके तीन साल के औसत में जुड़ जाता है, जिससे अगले साल बेसिक कोटा स्वतः बढ़ जाता है।
2. नए किसान (New Grower) के रूप में अधिकतम सीलिंग का लाभ
यदि आप नए किसान के रूप में पहली बार सट्टा खुलवा रहे हैं, तो उत्तर प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार:
- सीमांत किसान (1 हेक्टेयर तक): अधिकतम 60 क्विंटल प्रति बीघा (300-350 क्विंटल/एकड़) तक का प्रारंभिक कोटा सीधे स्वीकृत हो सकता है।
- बड़ा किसान: सिंचित भूमि पर अधिकतम सीलिंग तक पहला कोटा तय कराया जा सकता है।
3. सह-खातेदार का रकबा अपने सट्टे में शामिल कराना
यदि आपके परिवार के किसी सदस्य (भाई, माता) के पास जमीन है लेकिन वे गन्ना नहीं बोते, तो उनका राजस्व रकबा अपने घोषणा पत्र में ‘सहमति पत्र’ (Consent Letter) लगाकर शामिल कराएं। रकबा बढ़ने से बाउंडिंग प्रतिशत 85% से बढ़कर 100% तक पहुंच जाता है।
4. समिति अंशधारिता (Share Capital) बढ़ाना
गन्ना समिति में आपकी जितनी शेयर पूंजी (Share Money) होती है, उसी अनुपात में आपकी अधिकतम साख सीमा (Credit & Supply Ceiling) तय होती है। यदि आपका कोटा एक सीमा पर आकर रुक गया है, तो समिति में अतिरिक्त शेयर खरीदकर (प्रति शेयर ₹100-200) अपनी अधिकतम आपूर्ति सीमा बढ़वाएं।
5. आपदा वर्ष में विशेष प्रत्यावेदन (DCO Representation)
यदि किसी सत्र में लाल सड़न (Red Rot) या अत्यधिक जलभराव से आपकी फसल मारी गई थी और सप्लाई कम रही, तो वर्तमान पेराई सत्र शुरू होने से पहले जिला गन्ना अधिकारी (DCO) को प्रार्थना पत्र दें। जांच के बाद DCO उस खराब सत्र को शून्य मानकर आपके पुराने अच्छे सत्र के आधार पर कोटे की पुनर्बहाली (Restoration) कर देते हैं।
📋 बेसिक कोटा बनाम सट्टा सीमा (Maximum Supply Ceiling Table)
उत्तर प्रदेश गन्ना विकास विभाग द्वारा निर्धारित अधिकतम आपूर्ति सीमा:
| किसान की श्रेणी | अधिकतम धारित भूमि | अधिकतम बेसिक कोटा सीमा | प्रति पर्ची वजन |
|---|---|---|---|
| सीमांत कृषक (Marginal) | 1 हेक्टेयर तक (~12.5 बीघा) | 600 क्विंटल | 27 क्विंटल (ट्रॉली) / 9 क्विंटल (बुग्गी) |
| लघु कृषक (Small Farmer) | 1 से 2 हेक्टेयर तक | 1,200 क्विंटल | 27 / 45 क्विंटल |
| सामान्य कृषक (Medium) | 2 से 5 हेक्टेयर तक | 2,500 क्विंटल | 45 / 54 क्विंटल |
| बड़ा कृषक (Large Farmer) | 5 हेक्टेयर से अधिक | 5,000 क्विंटल (अधिकतम सीमा) | 54 क्विंटल बड़ा वाहन |
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्र.1: क्या बेसिक कोटा पैसे देकर बढ़वाया जा सकता है?
उत्तर: बिल्कुल नहीं! बेसिक कोटा पूरी तरह से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और पिछले 3 वर्षों के सप्लाई रिकॉर्ड पर आधारित होता है। कोई भी अधिकारी या कर्मचारी इसे सीधे हाथ से नहीं बढ़ा सकता। बिचौलियों के झांसे में न आएं।
प्र.2: यदि मैंने पिछले साल बिल्कुल गन्ना नहीं डाला तो क्या सट्टा खत्म हो जाएगा?
उत्तर: यदि लगातार 2 सत्रों तक किसान 1 क्विंटल भी गन्ना सप्लाई नहीं करता, तो उसका सट्टा ‘डिफॉल्टर’ (निष्क्रिय) सूची में चला जाता है। इसे दोबारा चालू कराने के लिए नया घोषणा पत्र और समिति सचिव का अनुमोदन चाहिए होता है।
प्र.3: क्या पौधा और पेड़ी दोनों का बेसिक कोटा अलग-अलग होता है?
उत्तर: नहीं। बेसिक कोटा किसान के पूरे खाते का एकमुश्त (Consolidated) होता है। हालांकि, कैलेंडर बनाते समय पेड़ी के रकबे को पहले 6 पक्षवाड़ों में और पौधे के रकबे को बाद के पक्षवाड़ों में बांटा जाता है।
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