
उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट (मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर, सहारनपुर, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत और अमरोहा) में पिछले दो-तीन वर्षों में जिस एक समस्या ने किसानों की कमर तोड़ी है, वह है Co 0238 में लगा भयानक लाल सड़न (Red Rot) रोग।
वर्ष 2012-13 में जब प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. बख्शी राम ने Co 0238 विकसित की थी, तो इसने यूपी के किसानों को 800 से 1000 क्विंटल प्रति एकड़ की पैदावार देकर धनवान बना दिया। लेकिन समय के साथ फंगस (Colletotrichum falcatum) ने इस किस्म की प्रतिरोधक क्षमता को तोड़ दिया। आज स्थिति यह है कि सितंबर आते-आते हरे-भरे खेत अचानक सूखकर लाल हो जाते हैं और 60% तक गन्ने की फसल बर्बाद हो जाती है।
इसी संकट को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और गन्ना विकास विभाग ने ‘गन्ना प्रजाति प्रतिस्थापन अभियान 2026-27’ (Seed Replacement Campaign) शुरू किया है, जिसके तहत Co 0238 के स्थान पर तीन उच्च पैदावार वाली रोगरोधी किस्मों पर 50% तक सरकारी अनुदान (Subsidy) दिया जा रहा है।
🏆 Co 0238 के विकल्प: शीर्ष 3 अगेती रोगरोधी प्रजातियों की तुलना
गन्ना शोध परिषद (UPCSR Shahjahanpur) और केंद्रीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR Lucknow) द्वारा प्रमाणित प्रमुख प्रजातियों का तुलनात्मक विश्लेषण:
| मानक (Parameters) | Co 0118 (करण-2) | Co 15023 (करण-15) | CoLk 14201 |
|---|---|---|---|
| परिपक्वता श्रेणी | अगेती (Early Maturing) | सुपर अगेती (Super Early) | अगेती (Early) |
| चीनी परता (Sugar Recovery) | 12.8% – 13.2% | 13.5% – 14.1% (सर्वाधिक) | 12.5% – 13.0% |
| औसत पैदावार (प्रति एकड़) | 480 – 580 क्विंटल | 500 – 620 क्विंटल | 450 – 540 क्विंटल |
| रेड रॉट प्रतिरोधकता | अति उच्च (Highly Resistant) | मध्यम से उच्च | उच्च (Resistant) |
| गिरने (Lodging) की समस्या | बहुत कम (मोटा व सीधा तना) | मध्यम (हल्की बंधाई आवश्यक) | न्यूनतम |
| पेड़ी क्षमता (Ratoon Yield) | उत्कृष्ट (शानदार फुटाव) | मध्यम | बहुत अच्छी |
| पोषक तत्वों की मांग | सामान्य खाद | अधिक जैविक खाद व पोटाश | सामान्य |
🌾 किस प्रजाति की क्या खासियत है?
1. Co 0118 (करण-2) — किसानों की सबसे भरोसेमंद पसंद
- पहचान: इसका गन्ना मध्यम मोटा, हल्के हरे-पीले रंग का होता है। पोरियां (Internodes) मध्यम लंबी और आंखें चपटी होती हैं।
- फायदा: इस किस्म की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह किसी भी हाल में गिरती नहीं है और इसमें रेड रॉट रोग का नामोनिशान नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिन खेतों में जलभराव या तेज हवाएं चलती हैं, वहां Co 0118 सबसे सुरक्षित विकल्प है।
2. Co 15023 (करण-15) — चीनी मिलों और गुड़ व्यापारियों का पहला प्यार
- पहचान: तेजी से बढ़ने वाली किस्म। पोरियां लंबी, छिलका मुलायम और रस अत्यंत मीठा होता है।
- फायदा: अक्टूबर में ही यह 10 महीने में पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है। चीनी मिलें इस किस्म को पहले पक्षवाड़े में ही तुरंत इंडेंट देकर उठाती हैं क्योंकि इसमें शर्करा रिकवरी 14% तक निकलती है। ट्रेंच विधि से बुवाई करने पर इसका फुटाव 15 से 18 कल्ले प्रति मेढ़ा निकलता है।
3. CoLk 14201 — तराई और पूर्वी यूपी की मिट्टी के लिए वरदान
- पहचान: भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR) लखनऊ द्वारा विकसित।
- फायदा: यह किस्म कम सिंचाई और भारी मटियार दोमट मिट्टी में भी शानदार प्रदर्शन करती है। इसमें तना छेदक (Top Borer) और पोक्का बोइंग का प्रकोप न के बराबर होता है।
💰 बीज अनुदान योजना: सरकारी रेट और सब्सिडी का गणित
उत्तर प्रदेश सरकार ‘पंचामृत योजना’ और ‘राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’ (RKVY) के तहत प्रमाणित बीज पर सीधा अनुदान दे रही है:
| मद (Item) | बाजार दर (बिना सब्सिडी) | गन्ना समिति अनुदानित दर | किसान की शुद्ध बचत |
|---|---|---|---|
| Co 0118 प्रमाणित बीज | ₹450 – ₹500 प्रति क्विंटल | ₹250 प्रति क्विंटल | ₹200 – ₹250/क्विंटल |
| Co 15023 टिशू कल्चर पौध | ₹4.50 प्रति पौधा | ₹2.00 प्रति पौधा | ₹2.50 प्रति पौधा |
| सिंगल बड एसटीपी नर्सरी ट्रे | ₹350 प्रति 100 पौधे | ₹180 प्रति 100 पौधे | ₹170 प्रति ट्रे |
[!TIP] एक एकड़ खेत के लिए सामान्य 2-आंख के टुकड़ों से बुवाई करने पर 25 से 30 क्विंटल बीज की आवश्यकता होती है। लेकिन यदि आप ‘सिंगल बड विधि’ (Single Bud Method) या पॉलीट्रे नर्सरी अपनाते हैं, तो मात्र 6 से 8 क्विंटल बीज में ही पूरा एक एकड़ खेत तैयार हो जाता है!
📋 समिति से बीज बुकिंग कराने की सरल प्रक्रिया
- समिति संपर्क: अपने विकास खंड की गन्ना विकास समिति या अपनी चीनी मिल के गन्ना विभाग कार्यालय (Cane Yard Office) में जाएं।
- बीज मांग पत्र: वहां ‘प्रमाणित बीज मांग पत्र’ भरें, जिसमें अपना किसान कोड और जितनी मात्रा में बीज चाहिए, दर्ज करें।
- आवश्यक आईडी: अपना आधार कार्ड और चालू सत्र का घोषणा पत्र संलग्न करें।
- अनुदान टोकन: समिति सचिव आपके नाम बीज आवंटन टोकन जारी करेगा, जिसे दिखाकर आप अधिकृत बीज नर्सरी (Cane Research Farm / Mill Seed Plot) से बीज उठा सकते हैं।
🧪 बुवाई से पहले बीज शोधन (Seed Treatment) का 100% अनिवार्य नियम
नई प्रजाति का बीज लाते ही उसे बिना उपचारित किए सीधे खेत में कभी न बोएं। बीज शोधन के लिए यह फॉर्मूला अपनाएं:
- घोल: 100 लीटर पानी + 100 ग्राम बाविस्टिन (Carbendazim) + 200 मिली इमिडाक्लोप्रिड (17.8 SL)
- गन्ने के दो-आंख वाले टुकड़ों को इस घोल में 15 मिनट तक डुबोकर रखें।
- इससे मिट्टी से फैलने वाले फंगस, दीमक (Termite) और सफेद गिडार (White Grub) से 90 दिनों तक 100% सुरक्षा मिलती है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्र.1: क्या मिल वाले Co 0238 को पूरी तरह बंद कर देंगे?
उत्तर: अचानक बंद नहीं किया जा सकता, लेकिन गन्ना आयुक्त के निर्देशों के अनुसार मिलें 2026-27 सत्र में Co 0238 का सट्टा रकबा 20% तक घटा रही हैं और आगामी वर्षों में इसे केवल सामान्य प्रजाति मानकर अंतिम पक्षवाड़ों में पेराई की जाएगी। इसलिए अभी नई किस्म लगाना ही समझदारी है।
प्र.2: क्या Co 15023 में जल्दी गिरने की बीमारी है?
उत्तर: Co 15023 बहुत तेजी से लंबाई पकड़ती है और इसका तना मुलायम होता है, इसलिए अगस्त-सितंबर में भारी बारिश के दौरान इसके गिरने का खतरा रहता है। इसका सरल समाधान यह है कि इसे ट्रेंच विधि से 1 फीट गहरी नाली में बोएं और अगस्त में दो बार गन्ने की बंधी कराएं।
प्र.3: क्या शाहजहांपुर रिसर्च फार्म से सीधे बीज मंगाया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, किसान UPCSR की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन किसान बुकिंग के तहत सीधे शाहजहांपुर, मुजफ्फरनगर, गोला गोकर्णनाथ या सेवरही शोध केंद्र से टोकन बुक कर सकते हैं।
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