
उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के खून-पसीने की कमाई को चीनी मिलें महीनों तक दबाकर बैठ जाती हैं। एक तरफ किसान खाद, बीज, डीजल और कीटनाशक के लिए बैंकों से 7% से 12% ब्याज पर केसीसी (KCC) लोन लेता है, दूसरी तरफ उसकी अपनी उपज का पैसा मिलों के पास बिना किसी कारण फंसा रहता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय संविधान और उत्तर प्रदेश राज्य कानून के तहत गन्ना किसान का भुगतान कोई खैरात नहीं, बल्कि एक सख्त कानूनी अनुबंध (Legal Contract) है?
उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम, 1953 की धारा 17 स्पष्ट रूप से प्रावधान करती है कि यदि तौल के 14वें दिन तक किसान का पैसा उसके बैंक खाते में क्रेडिट नहीं होता, तो 15वें दिन से मिल प्रबंधन पर 15% वार्षिक दर से ब्याज लगना कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाता है। आइए जानते हैं कि इस कानून का पूरा प्रावधान क्या है और किसान भाई इसका वास्तविक लाभ कैसे उठा सकते हैं।
⚖️ धारा 17 के 3 सबसे बड़े कानूनी अधिकार (Key Legal Provisions)
1. 14 दिन की समय-सीमा (Mandatory 14-Day Deadline)
धारा 17(1) के अनुसार, जैसे ही किसान का गन्ना क्रय केंद्र या मिल गेट के धर्मकांटे पर तौला जाता है और तौल पर्ची (Weight Slip) कटती है, उसी दिन से उल्टी गिनती शुरू हो जाती है। ठीक 14 कैलेंडर दिवसों के भीतर मिल को पूरा भुगतान किसान के खाते में ट्रांसफर करना ही होगा।
2. 15% वार्षिक ब्याज का अनिवार्य नियम (15% Per Annum Interest Clause)
धारा 17(3) के अनुसार:
“यदि कोई चीनी मिल किसी किसान को गन्ने की डिलीवरी के 14 दिनों के भीतर उसका मूल्य अदा करने में विफल रहती है, तो मिल को उस तिथि से वास्तविक भुगतान की तिथि तक 15 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज देना होगा।”
इलाहाबाद उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई ऐतिहासिक फैसलों (जैसे आनंद चीनी मिल बनाम यूपी राज्य) में स्पष्ट कहा है कि राज्य सरकार या केन कमिश्नर को भी इस 15% ब्याज को माफ करने का कोई अधिकार नहीं है!
3. चीनी बिक्री का 85% पैसा ‘एस्क्रो अकाउंट’ (Escrow Account) में सील
नियमों के अनुसार, चीनी मिल जो भी चीनी या शीरा (Molasses) बाजार में बेचती है, उसकी कुल बिक्री राशि का 85% हिस्सा एक अलग ‘एस्क्रो बैंक खाते’ में जमा होता है, जिस पर पहला और एकमात्र अधिकार गन्ना किसानों के भुगतान का होता है। मिल मालिक उस पैसे को अपने किसी अन्य व्यापार में नहीं लगा सकते।
🛑 यदि 14 दिन में भुगतान न आए तो क्या कार्रवाई होती है?
जब कोई चीनी मिल 14 दिन के नियम का उल्लंघन करती है, तो कानूनन निम्नलिखित 4 चरण की दंडात्मक प्रक्रिया शुरू होती है:
[14 दिन समाप्त]
↓
[DCO द्वारा कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice)]
↓
[केन कमिश्नर द्वारा धारा 17(4) के तहत आरसी (Recovery Certificate) जारी]
↓
[जिलाधिकारी (DM) द्वारा मिल की चीनी, शीरा व संपत्ति कुर्क कर नीलामी]
📋 रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) क्या होता है?
जब मिल लगातार भुगतान में डिफॉल्ट करती है, तो गन्ना आयुक्त उस मिल के खिलाफ ‘रिकवरी सर्टिफिकेट’ (RC) जारी करते हैं। यह भू-राजस्व बकाया (Arrears of Land Revenue) के समान होता है। इसके बाद जिले का डीएम और तहसीलदार मिल के गोदाम में रखी चीनी के बोरों को सील कर देते हैं और नीलामी करके सीधे किसानों के खातों में पैसा भेजते हैं।
📝 किसान भाई 15% ब्याज और बकाया भुगतान का दावा कैसे करें?
यदि आपकी किसी मिल पर पिछले सत्र का या चालू सत्र का 14 दिन से पुराना भुगतान बकाया है, तो यह 3-चरणीय प्रक्रिया अपनाएं:
चरण 1: तौल रसीद व बैंक स्टेटमेंट सुरक्षित करें
- अपनी तौल पर्ची (Supply Weight Slip) की मूल या डिजिटल कॉपी।
- अपना बैंक पासबुक स्टेटमेंट, जिसमें 14 दिन तक पैसा न आने की पुष्टि हो।
चरण 2: ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक / DCO को कानूनी प्रत्यावेदन दें
अपने जिले के जिला गन्ना अधिकारी (District Cane Officer) के कार्यालय में एक साधारण कागज पर प्रार्थना पत्र दें:
विषय: चीनी मिल… पर गन्ना मूल्य भुगतान में 14 दिन से अधिक विलंब होने पर धारा 17(3) के तहत 15% ब्याज सहित भुगतान कराने बाबत।
महोदय, प्रार्थी [नाम], किसान कोड… ने दिनांक [तारीख] को [वजन] क्विंटल गन्ना मिल को सप्लाई किया था। आज [तारीख] तक 14 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मूल भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है। अतः गन्ना अधिनियम की धारा 17 के तहत मिल से 15% ब्याज सहित तत्काल भुगतान कराया जाए।
चरण 3: गन्ना आयुक्त ऑनलाइन पोर्टल व हेल्पलाइन पर शिकायत
उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक गन्ना पोर्टल और हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करें:
- टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-121-3203 (कैन यूपी 24x7 कॉल सेंटर)
- मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल: jansunwai.up.nic.in पर ‘गन्ना एवं चीनी उद्योग विभाग’ श्रेणी में शिकायत दर्ज करें।
📊 भुगतान स्थिति चेक करने की तालिका (Payment Status Flowchart)
| स्थिति कोड (Status in eGanna) | इसका क्या अर्थ है? | किसान को क्या करना चाहिए? |
|---|---|---|
| Parchi Weighed (तौल संपन्न) | गन्ने का वजन कंप्यूटर में दर्ज हो चुका है | 14 दिन का इंतजार करें |
| Advice Generated (एडवाइस जारी) | मिल ने भुगतान का बिल पास कर दिया है | 48 घंटे में पैसा बैंक पहुंचेगा |
| Bank Sent / UTR Pending | पैसा बैंक को प्रेषित हो चुका है, यूटीआर का इंतजार है | अपनी शाखा में संपर्क करें |
| Payment Success (सफल) | धनराशि आपके बैंक खाते में जमा हो चुकी है | पासबुक एंट्री कराएं या एटीएम चेक करें |
| Payment Rejected (अस्वीकृत) | गलत खाता संख्या या इनएक्टिव बैंक खाता | तत्काल समिति में नया खाता जमा करें |
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्र.1: क्या चीनी मिलें वास्तव में 15% ब्याज देती हैं?
उत्तर: जब किसान कानूनी रूप से जागरूक होकर समूह में या उच्च न्यायालय के माध्यम से मांग उठाते हैं, तो सरकार को मिलों की संपत्ति कुर्क कर ब्याज सहित भुगतान कराना पड़ता है। पिछले वर्षों में शामली, मुरादाबाद और लखीमपुर की कई मिलों को ब्याज सहित भुगतान करने के आदेश जारी हुए हैं।
प्र.2: क्या भुगतान सीधे बैंक खाते में आता है या चेक से?
उत्तर: वर्तमान में उत्तर प्रदेश की सभी चीनी मिलों में 100% भुगतान डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे किसान के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में भेजा जाता है। चेक या नकद भुगतान की कोई व्यवस्था नहीं है।
प्र.3: यदि मेरी तौल पर्ची खो गई है तो क्या भुगतान रुक जाएगा?
उत्तर: नहीं! तौल होते ही डाटा सीधे केंद्रीय ERP सर्वर पर ऑनलाइन दर्ज हो जाता है। यदि पर्ची खो भी गई है, तो eGanna App या enquiry.caneup.in पर आपकी तौल का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है और नियत समय पर भुगतान स्वतः आपके खाते में आएगा।
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
यह आर्टिकल कैसा लगा?


