
उत्तर प्रदेश में गन्ना पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से ठीक पहले सभी गन्ना समितियों और चीनी मिलों द्वारा गन्ना सट्टा कैलेंडर ऑनलाइन जारी कर दिया जाता है। जब आप अपने मोबाइल पर eGanna App या enquiry.caneup.in पोर्टल खोलते हैं, तो आपके सामने 12 पंक्तियाँ (Rows) और 15 स्तम्भ (Columns) की एक सारणी आती है। इसे ही तकनीकी भाषा में “12 पक्षवाड़ा व 15 कॉलम गन्ना पर्ची कैलेंडर” कहा जाता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मुजफ्फरनगर, मेरठ, शामली, बिजनौर, सहारनपुर, बागपत) से लेकर मध्य व तराई (लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर) और पूर्वांचल के लाखों किसान इस कैलेंडर को देखकर असमंजस में रहते हैं कि:
- “मेरा कुल बेसिक कोटा कितना है और कितनी पर्चियां बनेंगी?”
- “कैलेंडर में 12 पक्षवाड़े ही क्यों होते हैं, 10 या 14 क्यों नहीं?”
- “1 से 15 कॉलम का क्या मतलब है और मेरी पर्ची किस तारीख को कटेगी?”
- “यदि किसी कॉलम में पर्ची मिस हो गई तो उसका क्या होगा?”
इस विस्तृत गाइड में हम उत्तर प्रदेश गन्ना एवं चीनी आयुक्त (Cane Commissioner Lucknow) द्वारा निर्धारित आधिकारिक नियमों के आधार पर पर्ची कैलेंडर के पूरे गणित को आसान भाषा में समझेंगे।
📅 12 पक्षवाड़ा (Pakhwada) क्या होता है? (कैलेंडर की समय-सीमा)
गन्ना विभाग की शब्दावली में एक माह को दो हिस्सों में बांटा जाता है, जिसे ‘पक्षवाड़ा’ (Fortnight) कहते हैं। प्रत्येक पक्षवाड़ा सामान्यतः 15 दिनों का होता है:
- प्रथम पक्षवाड़ा (1 से 15 तारीख)
- द्वितीय पक्षवाड़ा (16 से माह का अंत)
उत्तर प्रदेश में सामान्य चीनी मिलों का पेराई सत्र औसतन 180 दिन (लगभग 6 महीने) चलता है। 6 महीनों को जब 15-15 दिनों के हिस्सों में बांटा जाता है, तो कुल 12 पक्षवाड़े (12 Pakhwada) बनते हैं।
🗓️ पेराई सत्र 2026-27 का पक्षवाड़ा टाइम-टेबल
| पक्षवाड़ा क्रम (Pakhwada) | अनुमानित समय अवधि (Timeline) | पेराई का चरण | गन्ने का प्रकार |
|---|---|---|---|
| 1st Pakhwada | 25 अक्टूबर – 10 नवंबर | मिल शुरुआत (Trial Crushing) | अगेती प्रजाति पेड़ी (Early Ratoon) |
| 2nd Pakhwada | 11 नवंबर – 25 नवंबर | गति पकड़ना (Ramp-up) | अगेती पेड़ी (Co 0118, Co 15023) |
| 3rd Pakhwada | 26 नवंबर – 10 दिसंबर | सामान्य पेराई | अगेती पेड़ी व पौधा |
| 4th Pakhwada | 11 दिसंबर – 25 दिसंबर | पीक पेराई (Peak Season) | अगेती पौधा व पेड़ी |
| 5th Pakhwada | 26 दिसंबर – 10 जनवरी | पीक विंटर पेराई | सामान्य व अगेती प्रजाति |
| 6th Pakhwada | 11 जनवरी – 25 जनवरी | मध्य पेराई सत्र | पौधा व पेड़ी |
| 7th Pakhwada | 26 जनवरी – 10 फरवरी | तेज पेराई | मुख्य पौधा गन्ना |
| 8th Pakhwada | 11 फरवरी – 25 फरवरी | बसंत आगमन | पौधा गन्ना |
| 9th Pakhwada | 26 फरवरी – 12 मार्च | लेट सीजन शुरुआत | पौधा व देर से पकने वाली किस्में |
| 10th Pakhwada | 13 मार्च – 28 मार्च | समापन की ओर | पिछेती किस्में |
| 11th Pakhwada | 29 मार्च – 15 अप्रैल | अंतिम दौर | अवशेष गन्ना |
| 12th Pakhwada | 16 अप्रैल – 30 अप्रैल | सत्र समाप्ति (Closing) | मिल गेट अंतिम पेराई |
🔢 1 से 15 कॉलम का क्या मतलब है? (Column Logic Decoded)
पक्षवाड़े के भीतर 1 से 15 तक के कॉलम उस 15 दिनों के भीतर दिन-वार या रोटेशन-वार पर्ची कटने के क्रम को दर्शाते हैं।
- कॉलम = मिल की कार्यक्षमता (Daily Capacity Slice): प्रत्येक चीनी मिल की दैनिक पेराई क्षमता (TCD - Tonnes Crushed Per Day) तय होती है। मिल अपनी क्षमता के अनुसार पूरे क्षेत्र के किसानों को 1 से 15 कॉलम में विभाजित करती है।
- कॉलम 1 से 15 का क्रम: जब कोई पक्षवाड़ा शुरू होता है, तो पहले दिन कॉलम नंबर 1 के किसानों की पर्ची जारी होती है। दूसरे दिन कॉलम 2, तीसरे दिन कॉलम 3… और 15वें दिन कॉलम 15 की पर्ची कटती है।
- रोटेशन प्रणाली: ऐसा नहीं होता कि बड़े किसान को ही पहले पर्ची मिले। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर छोटे, सीमांत और बड़े सभी किसानों की पर्चियों को 1 से 15 कॉलम में इस प्रकार वितरित करता है कि किसी किसान का गन्ना खेत में खड़ा सूख न जाए।
[!IMPORTANT] कॉलम में दर्ज संख्या का अर्थ: यदि आपके कैलेंडर में 4th Pakhwada के कॉलम नंबर 7 में ‘1’ लिखा है, तो इसका सीधा अर्थ है कि चौथे पक्षवाड़े के 7वें दिन आपकी 1 पर्ची (Supply Ticket) कटेगी। यदि वहां ‘2’ लिखा है, तो 2 पर्चियां जारी होंगी। खाली (Empty) सेल का मतलब है उस दिन आपकी कोई पर्ची नहीं है।
🧮 बेसिक कोटा से पर्ची संख्या निकालने का सरकारी फॉर्मूला
गन्ना किसानों के मन में सवाल रहता है कि उनकी कुल पर्चियां कैसे तय होती हैं? इसका सीधा संबंध आपके बेसिक कोटा (Basic Quota) और वाहन के प्रकार (Cart vs Trolley Mode) से होता है।
उत्तर प्रदेश गन्ना आपूर्ति नीति के अनुसार:
- बैलगाड़ी / छोटा वाहन (Cart): 1 पर्ची = 9 क्विंटल (या 18 क्विंटल डबल झोटा बुग्गी)
- ट्रैक्टर-ट्रॉली (छोटा मॉडल): 1 पर्ची = 27 क्विंटल (Standard Trolley)
- ट्रैक्टर-ट्रॉली (बड़ा 4-व्हील मॉडल): 1 पर्ची = 45 क्विंटल या 54 क्विंटल
📊 उदाहरण गणना (Calculation Example)
मान लीजिए किसान सोमेंद्र सिंह का बेसिक कोटा 270 क्विंटल स्वीकृत हुआ है और उन्होंने समिति में अपना आपूर्ति साधन 27 क्विंटल वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली दर्ज कराया है:
- कुल पर्चियां = 270 ÷ 27 = 10 पर्चियां
अब ये 10 पर्चियां कैलेंडर के 12 पक्षवाड़ों में कैसे बंटेंगी?
- गन्ना विभाग का सॉफ्टवेयर पेड़ी गन्ने (Ratoon) की पर्चियों को 1 से 6 पक्षवाड़े में प्राथमिकता देता है (क्योंकि पेड़ी जल्दी पकती है)।
- पौधे गन्ने (Plant Cane) की पर्चियों को 6 से 11 पक्षवाड़े में फैलाया जाता है।
- 10 पर्चियों में से 6 पर्चियां पहले 6 पक्षवाड़ों में (प्रत्येक पक्षवाड़े में 1-1 पर्ची) और 4 पर्चियां 7वें से 10वें पक्षवाड़े में 1-1 करके अलग-अलग कॉलम में लगाई जाएंगी।
⚠️ यदि किसी कॉलम में पर्ची छूट जाए या न कटे तो क्या करें?
कई बार किसान शिकायत करते हैं कि कैलेंडर में 5वें पक्षवाड़े के 8वें कॉलम में पर्ची दर्ज थी, लेकिन उस दिन पर्ची का एसएमएस नहीं आया और ऐप में पर्ची शो नहीं हुई। इसके 3 प्रमुख कारण होते हैं:
- चीनी मिल में ब्रेकडाउन (No Cane / Mill Breakdown): यदि मिल की मशीनरी में खराबी आ गई या मिल 24-48 घंटे बंद रही, तो उस दिन के कॉलम की पर्चियां आगे खिसक (Postpone) जाती हैं।
- सप्लाई टिकट कोटा रोक (Indent Freeze): जब यार्ड में गन्ने से लदी ट्रॉलियों की 2-3 किमी लंबी लाइन लग जाती है, तो सुरक्षा कारणों से जिला गन्ना अधिकारी (DCO) 1 दिन के लिए इंडेंट रोक देते हैं।
- कैलेंडर री-शफलिंग (Re-scheduling): छूटी हुई पर्ची रद्द नहीं होती, बल्कि उसे अगले पक्षवाड़े के ‘हॉट कॉलम’ (Hot Column) या अंत में अतिरिक्त पर्ची (Defaulter / Extra Column) के रूप में स्वतः जोड़ दिया जाता है।
📱 enquiry.caneup.in पर अपना पर्ची कैलेंडर देखने के 5 आसान स्टेप्स
- अपने मोबाइल ब्राउज़र में आधिकारिक पोर्टल enquiry.caneup.in खोलें।
- स्क्रीन पर दिख रहा कैप्चा कोड (Captcha) भरें और ‘View’ पर क्लिक करें।
- अपना जिला (District), अपनी गन्ना समिति (Cane Society) और अपनी चीनी मिल (Sugar Mill) चुनें।
- अपना गाँव (Village Code) और किसान कोड (Grower Code) दर्ज करें (अथवा ‘Search by Name’ से ढूंढें)।
- किसान डैशबोर्ड खुलने के बाद नीचे टैब में ‘गन्ना कैलेंडर’ (Cane Calendar) पर क्लिक करें। पूरा 12 पक्षवाड़ा और 15 कॉलम चार्ट आपके सामने खुल जाएगा।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्र.1: क्या मैं अपने कैलेंडर के कॉलम खुद बदलवा सकता हूँ?
उत्तर: नहीं। कॉलम का आवंटन गन्ना आयुक्त के केंद्रीकृत ERP सॉफ्टवेयर द्वारा निष्पक्ष व पारदर्शी लॉटरी सिस्टम से होता है। कोई भी मिल क्लर्क या समिति कर्मचारी मैन्युअल तरीके से कॉलम में बदलाव नहीं कर सकता।
प्र.2: पेड़ी गन्ने की पर्ची पहले पक्षवाड़ों में ही क्यों आती है?
उत्तर: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पेड़ी गन्ने में सुक्रोज (शर्करा) की मात्रा अक्टूबर-नवंबर में ही 16-18% तक पहुंच जाती है। यदि पेड़ी को मार्च-अप्रैल तक खड़ा रखा जाए तो वह सूखने लगती है और वजन घट जाता है। इसलिए सरकारी नीति में पेड़ी की पर्चियां शुरुआती 6 पक्षवाड़ों में दी जाती हैं।
प्र.3: अगर मेरे पास 45 क्विंटल की बड़ी ट्रॉली है, तो क्या मेरी पर्चियां कम हो जाएंगी?
उत्तर: हाँ, क्योंकि आपका कुल वजन वही रहेगा। 270 क्विंटल के कोटे में 27 क्विंटल की 10 पर्चियां बनती हैं, जबकि 45 क्विंटल की केवल 6 पर्चियां बनेंगी। लेकिन आपका पूरा गन्ना 6 फेरों में ही मिल पहुंच जाएगा, जिससे ढुलाई का खर्च और समय दोनों बचता है।
प्र.4: क्या सट्टा संशोधन में कैलेंडर के पक्षवाड़े बदले जा सकते हैं?
उत्तर: यदि आपके पास पेड़ी गन्ना ज्यादा था और सर्वे में पौधा दर्ज हो गया था, तो सट्टा संशोधन कराकर प्रजाति सुधरवाने पर सॉफ्टवेयर आपके पक्षवाड़े को स्वतः आगे से पीछे (शुरुआती पक्षवाड़ों में) शिफ्ट कर देता है।
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गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
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