
उत्तर प्रदेश सरकार और कृषि वैज्ञानिकों का वर्तमान में सबसे बड़ा जोर इस बात पर है कि “खेती में प्रति वर्ग मीटर उत्पादकता कैसे बढ़ाई जाए?”। जब किसान भाई 4 से 5 फीट की दूरी पर ट्रेंच विधि से शरदकालीन गन्ना बोते हैं, तो दोनों नालियों के बीच लगभग 3.5 फीट की मेढ़ (Bed) 90 दिनों तक बिल्कुल खाली पड़ी रहती है। यदि इस जमीन पर कुछ न बोया जाए, तो वहां बथुआ, मोथा और चौड़ी पत्ती के खरपतवार उग आते हैं, जिनकी निराई-गुड़ाई में हजारों रुपये बर्बाद होते हैं।
इसके विपरीत, यदि आप उस खाली मेढ़ पर सरसों, आलू, मटर, लहसुन या गोभी की सह-फसल (Intercropping) लेते हैं:
- खरपतवारों को उगने की जगह ही नहीं मिलती।
- सह-फसल को दिया गया पानी और खाद गन्ने की जड़ों को भी मिलता है।
- 90 से 100 दिन में सह-फसल कटकर बाजार में बिक जाती है, जिससे किसान को ₹40,000 से ₹60,000 की नकद आय गन्ने की तुलाई से 8 महीने पहले ही हाथ में आ जाती है!
🥇 यूपी के लिए शीर्ष 3 गन्ना सह-फसली मॉडल (Intercropping Models)
मॉडल 1: गन्ना + पीली/काली सरसों (Sugarcane + Mustard) — सबसे लोकप्रिय व कम लागत
- नाली की दूरी: गन्ने की नालियां 4.5 फीट की दूरी पर बनाएं।
- सरसों बोने का स्थान: दो गन्ने की नालियों के बीच बनी चौड़ी मेढ़ पर सरसों की 1 या 2 कतारें लगाएं। कतार से कतार की दूरी 30 सेमी रखें।
- उपयुक्त किस्में: पूसा मस्टर्ड 25, पूसा बोल्ड, पीताम्बरी (पीली सरसों) या आरएच 749।
- पैदावार व आय: प्रति एकड़ 5 से 7 क्विंटल सरसों की पैदावार होती है। ₹6,000/क्विंटल के भाव पर मात्र 100 दिन में ₹30,000 से ₹42,000 की नकद आमदनी हो जाती है।
मॉडल 2: गन्ना + अगेती आलू (Sugarcane + Early Potato) — सर्वाधिक मुनाफा देने वाला मॉडल
- नाली की दूरी: गन्ने की नालियां 4.5 से 5 फीट की दूरी पर रखें।
- आलू बोने का स्थान: मेढ़ के ऊपर आलू की दो पंक्तियां लगाएं (पौधे से पौधे की दूरी 20 सेमी)।
- उपयुक्त किस्में: कुफरी पुखराज, कुफरी ख्याति, कुफरी चिपसोना (अगेती 70-80 दिन वाली किस्में)।
- पैदावार व आय: प्रति एकड़ 80 से 100 पैकेट (लगभग 40-50 क्विंटल) आलू आसानी से निकल आता है। नवंबर-दिसंबर में नया आलू बाजार में ₹1,000 से ₹1,500 प्रति पैकेट बिकता है, जिससे ₹60,000 से ₹80,000 का सकल मुनाफा मिलता है।
मॉडल 3: गन्ना + अगेती मटर (Sugarcane + Green Pea) — मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाला मॉडल
- नाली की दूरी: 4 फीट की दूरी पर गन्ने की नाली।
- मटर बोने का स्थान: मेढ़ के दोनों ढलानों पर मटर की बुवाई।
- उपयुक्त किस्में: पूसा प्रगति, काशी नंदिनी, जीएस-10।
- अतिरिक्त लाभ: मटर एक दलहनी (Leguminous) फसल है। इसकी जड़ों में राइजोबियम बैक्टीरिया होते हैं जो हवा से नाइट्रोजन खींचकर मिट्टी में जमा करते हैं। इससे गन्ने को मुफ्त की 25 किग्रा यूरिया खाद मिल जाती है और हरी मटर की फलियां ₹40-50/किग्रा बिकती हैं।
💰 प्रति एकड़ सह-फसली अर्थशास्त्र (Economic Comparison Table)
| विवरण (Head) | केवल एकल गन्ना (Solo Cane) | गन्ना + सरसों सह-फसल | गन्ना + आलू सह-फसल |
|---|---|---|---|
| गन्ने की पैदावार (प्रति एकड़) | 450 क्विंटल | 500 क्विंटल (हवा-धूप मिलने से अधिक) | 520 क्विंटल |
| गन्ने से सकल आय (@ ₹370/क्वि.) | ₹1,66,500 | ₹1,85,000 | ₹1,92,400 |
| सह-फसल से शुद्ध आय | ₹0 | ₹32,000 (सरसों) | ₹55,000 (आलू) |
| कुल सकल आमदनी (Gross Income) | ₹1,66,500 | ₹2,17,000 | ₹2,47,400 |
| कुल खेती लागत (Total Expense) | ₹45,000 | ₹52,000 | ₹68,000 |
| किसान की शुद्ध बचत (Net Profit) | ₹1,21,500 | ₹1,65,000 (+₹43,500 बचत) | ₹1,79,400 (+₹57,900 बचत) |
🚫 सह-फसली खेती में खरपतवारनाशी (Weedicide) स्प्रे की सबसे बड़ी चेतावनी!
अधिकांश किसान सह-फसली खेती में एक बहुत बड़ी गलती करते हैं। गन्ने में आमतौर पर खरपतवार मारने के लिए एट्राजीन (Atrazine 50% WP) या 2,4-D अमाइन साल्ट का छिड़काव किया जाता है।
[!CAUTION] सावधान! यदि आपने गन्ने के साथ सरसों, आलू, मटर या चना बोया है, तो भूलकर भी एट्राजीन या 2,4-D का स्प्रे न करें! ये दवाएं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के साथ-साथ आपकी सरसों, मटर और आलू को 24 घंटे में पूरी तरह जलाकर राख कर देंगी।
सह-फसल में खरपतवार नियंत्रण का सही वैज्ञानिक तरीका:
- बुवाई के 48 घंटे के भीतर (Pre-emergence): केवल पेंडीमेथालिन (Pendimethalin 30% EC) 1.0 से 1.25 लीटर प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में मिलाकर खेत में स्प्रे करें। यह गन्ने और सरसों/आलू दोनों के लिए 100% सुरक्षित है।
- सह-फसल कटाई के बाद (Post-harvest): जब दिसंबर-जनवरी में सरसों या आलू कट जाए, तब आप गन्ने की मेढ़ पर मिट्टी चढ़ाते समय सामान्य खरपतवारनाशी का उपयोग कर सकते हैं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्र.1: क्या सह-फसल लगाने से गन्ने की पैदावार घट जाती है?
उत्तर: बिल्कुल नहीं! वैज्ञानिक परीक्षणों से साबित हुआ है कि 4.5 फीट ट्रेंच में जब बीच में सरसों या मटर बोई जाती है, तो सह-फसल की जड़ों द्वारा मिट्टी भुरभुरी होती है और दोनों फसलों में परस्पर कीट नियंत्रण रहता है। गन्ने की पैदावार घटने के बजाय 5% से 10% बढ़ जाती है।
प्र.2: क्या सरसों के गन्ने पर छाया (Shading) करने का खतरा रहता है?
उत्तर: यदि आप 4.5 फीट की दूरी रखते हैं और सरसों की केवल 1 या 2 कतारें मेढ़ पर लगाते हैं, तो कोई छाया नहीं पड़ती। इसके अलावा, दिसंबर के अंत तक जब सरसों फलियां बनाने लगती है, तब तक गन्ना सुप्त अवस्था में रहता है, इसलिए कोई प्रतिस्पर्धा नहीं होती।
प्र.3: सह-फसल में पानी का प्रबंधन कैसे करें?
उत्तर: ट्रेंच विधि में पानी केवल गन्ने की नाली में दिया जाता है। मेढ़ पर लगी सरसों या आलू को ‘रिसाव’ (Seepage / Capillary Action) से पर्याप्त नमी मिल जाती है, जिससे आलू कभी गलता नहीं है और सरसों को ज्यादा पानी से होने वाले नुकसान से मुक्ति मिलती है।
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