
उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गन्ना सट्टा केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि किसान परिवार की पूरे साल की आजीविका की रीढ़ होता है। जब परिवार के मुख्य सट्टाधारक किसान (पिता, दादा या पति) का आकस्मिक देहांत हो जाता है, तो परिवार के सामने दोहरी विपत्ति आ खड़ी होती है:
- सट्टे का ब्लॉक होना: यदि बैंक में मृतक का खाता बंद हो गया, तो मिल द्वारा भेजा गया गन्ने का भुगतान वापस (Bounce) हो जाता है।
- बेसिक कोटे का नुकसान: यदि समय रहते वरासत दर्ज नहीं कराई गई, तो गन्ना विकास समिति उस सट्टे को ‘निष्क्रिय’ (Inactive/Dead) घोषित कर सकती है, जिससे वर्षों से संचित किया गया बेसिक कोटा समाप्त होने का खतरा रहता है।
गन्ना एवं चीनी आयुक्त, उत्तर प्रदेश द्वारा जारी ‘गन्ना आपूर्ति एवं सट्टा नीति 2026-27’ में वारिसों के हित संरक्षण के लिए विशेष वरासत प्रावधान किए गए हैं। आइए जानते हैं कि मृतक किसान का सट्टा बिना किसी परेशानी के विधिक वारिसों के नाम कैसे स्थानांतरित कराया जाए।
⚖️ गन्ना सट्टा वरासत के प्रमुख सरकारी नियम
गन्ना अधिनियम 1953 एवं नियमावली के अनुसार:
- प्राथमिकता क्रम: सट्टाधारक के देहांत के बाद सट्टा सर्वप्रथम उसकी पत्नी (विधवा) के नाम या आपसी सहमति से पुत्रों/पुत्रियों (विधिक वारिसों) के नाम ट्रांसफर किया जाता है।
- बेसिक कोटे का पूर्ण हस्तांतरण: वरासत के मामले में मृतक किसान का संचित बेसिक कोटा (Basic Quota) शून्य नहीं होता, बल्कि वह वारिस के नए सट्टे में 100% जोड़ दिया जाता है।
- संयुक्त सट्टा बनाम पृथक सट्टा: यदि मृतक के दो या तीन बेटे हैं, तो वे चाहें तो एक संयुक्त सट्टा (Joint Satta) रख सकते हैं अथवा अपनी खतौनी के पैतृक हिस्से के अनुसार अलग-अलग नए सट्टे (Separate Satta) बनवाकर बेसिक कोटे को आपस में बराबर विभाजित करा सकते हैं।
📑 वरासत के लिए आवश्यक दस्तावेजों की सूची (Checklist)
सट्टा नामांतरण के लिए गन्ना विकास समिति में आवेदन करते समय निम्नलिखित 7 दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:
| क्रम | दस्तावेज का नाम | जारीकर्ता प्राधिकारी / विवरण |
|---|---|---|
| 1 | मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) | ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VDO) / नगर पालिका द्वारा जारी मूल प्रति |
| 2 | वारिसान खतौनी (तहसील आदेश) | राजस्व न्यायालय (तहसीलदार) द्वारा धारा 33/34 के तहत दर्ज वरासत आदेश युक्त खतौनी |
| 3 | परिवार रजिस्टर की प्रमाणित नकल | ग्राम पंचायत से प्राप्त, जिसमें सभी वारिसों के नाम दर्ज हों |
| 4 | वारिस का आधार कार्ड व पैन कार्ड | जिसके नाम सट्टा ट्रांसफर होना है |
| 5 | वारिस का नया बैंक पासबुक | किसी भी राष्ट्रीयकृत/सहकारी बैंक का चालू खाता (IFSC कोड सहित) |
| 6 | ₹100 के स्टांप पर शपथ पत्र (Affidavit) | नोटरी पब्लिक द्वारा सत्यापित वारिसान शपथ पत्र |
| 7 | अन्य वारिसों का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) | यदि एक भाई के नाम सट्टा होना है, तो अन्य भाइयों व माता की सहमति |
📜 ₹100 के स्टांप पेपर पर शपथ पत्र का प्रारूप (Affidavit Format)
तहसील या नोटरी वकील से शपथ पत्र बनवाते समय निम्नलिखित प्रारूप का प्रयोग करें:
समक्ष: ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक / सचिव, सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड…
मैं [वारिस का नाम], पुत्र स्वर्गीय [मृतक किसान का नाम], निवासी ग्राम… परगना… तहसील… जिला… उत्तर प्रदेश, शपथपूर्वक निम्नलिखित बयान करता हूँ:
- यह कि मेरे पूज्य पिता स्वर्गीय [नाम] समिति के ग्राम कोड संख्या… व कृषक कोड संख्या… के नियमित सट्टाधारक किसान थे।
- यह कि मेरे पिता का देहांत दिनांक [तारीख] को हो गया है, जिसका मृत्यु प्रमाण पत्र संलग्न है।
- यह कि राजस्व खतौनी खाता संख्या… में हम सभी वारिसों का नाम राजस्व निरीक्षक/तहसीलदार के आदेशानुसार विधिवत दर्ज हो चुका है।
- यह कि परिवार के सभी विधिक वारिसों की आपसी सहमति से उक्त गन्ना सट्टा व बेसिक कोटा मेरे नाम [वारिस का नाम] स्थानांतरित किए जाने पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है।
- यह कि यदि भविष्य में कोई पारिवारिक विवाद उत्पन्न होता है, तो उसकी संपूर्ण वैधानिक जिम्मेदारी मेरी होगी।
शपथकर्ता के हस्ताक्षर व सत्यापन
🚶♂️ सट्टा वरासत कराने की चरणबद्ध प्रक्रिया (Step-by-Step Guide)
कदम 1: पहले राजस्व खतौनी में वरासत दर्ज कराएं
गन्ना समिति राजस्व रिकॉर्ड (Khatauni) को ही सर्वोच्च आधार मानती है। इसलिए पिता के निधन के बाद सबसे पहले ग्राम लेखपाल से मिलकर ‘आरसी प्रपत्र 11’ (राजस्व संहिता धारा 33) के तहत वरासत दर्ज कराएं और नई खतौनी निकलवाएं।
कदम 2: गन्ना विकास समिति से वरासत फॉर्म प्राप्त करें
अपनी संबंधित गन्ना समिति (Cane Society Office) में जाएं और काउंटर से ‘सट्टा नामांतरण / वरासत प्रार्थना पत्र’ प्राप्त करें।
कदम 3: हल्का गन्ना पर्यवेक्षक (Cane Supervisor) की आख्या
सभी 7 दस्तावेजों की फोटोकॉपी फॉर्म के साथ नत्थी करके अपने गांव के गन्ना पर्यवेक्षक को दिखाएं। पर्यवेक्षक गांव में जाकर या प्रधान से पुष्टि कर फॉर्म पर अपनी सकारात्मक आख्या (Inspection Report) दर्ज करेगा।
कदम 4: सचिव (Secretary) अनुमोदन व ERP में नाम परिवर्तन
पर्यवेक्षक की संस्तुति के बाद पत्रावली समिति सचिव और ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक (SCDI) के पास जाएगी। उनके डिजिटल हस्ताक्षर होते ही समिति का कंप्यूटर ऑपरेटर ERP सॉफ्टवेयर में मृतक के स्थान पर नए वारिस का नाम, आधार और बैंक खाता अपडेट कर देगा।
⚠️ यदि भाइयों में सहमति न बने तो क्या होगा? (Dispute Resolution)
यदि मृतक के तीन पुत्र हैं और वे किसी एक के नाम सट्टा रखने पर सहमत नहीं हैं:
- कोई भी भाई जबरन अकेले सट्टा अपने नाम नहीं करा सकता।
- ऐसी स्थिति में तीनों भाई अपनी खतौनी के अंश निर्धारण (Share Partition) के आधार पर अलग-अलग आवेदन करेंगे।
- गन्ना समिति पिता के कुल बेसिक कोटे को तीनों भाइयों के खतौनी रकबे के अनुपात में तीन अलग-अलग नए सट्टों में बांट देगी। इससे किसी का हक नहीं मारा जाता।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्र.1: वरासत कराने में कितना समय लगता है?
उत्तर: यदि आपके पास राजस्व खतौनी और मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार है, तो गन्ना समिति में आवेदन जमा करने के 7 से 10 कार्यदिवसों के भीतर सट्टा नए नाम पर ट्रांसफर हो जाता है।
प्र.2: क्या वरासत के लिए समिति में कोई फीस देनी होती है?
उत्तर: नए सदस्य के रूप में यदि वारिस पहले से समिति का शेयरधारक नहीं है, तो उसे समिति की शेयर सदस्यता फीस (सामान्यतः ₹110 से ₹210) रसीद कटवाकर जमा करनी होती है। इसके अलावा कोई अन्य शुल्क नहीं लगता।
प्र.3: अगर पेराई सत्र शुरू होने तक वरासत न हो पाए, तो गन्ने का क्या होगा?
उत्तर: ऐसी आपात स्थिति में वारिस समिति सचिव को प्रार्थना पत्र देकर ‘विधिक वारिस का बैंक खाता’ अस्थाई रूप से टैग करवा सकते हैं ताकि उस वर्ष की पर्चियां व्यर्थ न जाएं और गन्ना तौला जा सके।
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