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UP कृषि यंत्र अनुदान योजना 2026: रोटावेटर, ट्रेंच ओपनर व मल्चर पर 80% तक सब्सिडी — ऑनलाइन ई-लॉटरी व टोकन बुकिंग

Aamir Raza Aamir Raza • Sep 1, 2026 • अपडेट: Sep 5, 2026 10:00 AM IST • 10 min read
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UP कृषि यंत्र अनुदान योजना 2026: रोटावेटर, ट्रेंच ओपनर व मल्चर पर 80% तक सब्सिडी — ऑनलाइन ई-लॉटरी व टोकन बुकिंग
अंतिम अपडेट: September 5, 2026 10:00 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मुख्य बिंदु (Quick Summary): गन्ना खेती में आधुनिक कृषि यंत्रों से मजदूरी खर्च 60% घटता है। यूपी कृषि यंत्र अनुदान योजना के तहत रोटावेटर, ट्रेंच मेकर व मल्चर पर ₹50,000 से ₹5 लाख तक की सब्सिडी का पूरा लाभ उठाएं।

उत्तर प्रदेश के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में बढ़ती मजदूरी दर, श्रमिकों की भारी कमी और समय पर खेत तैयार न हो पाने के कारण गन्ने की लागत में लगातार इजाफा हो रहा है। पारंपरिक हल-बैल या साधारण कल्टीवेटर से गन्ने की खेती करने में अत्यधिक समय और ईंधन बर्बाद होता है। इस समस्या से निपटने और खेती को पूरी तरह आधुनिक व यांत्रिक (Mechanized) बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि विभाग एवं गन्ना विकास विभाग द्वारा ‘कृषि यंत्रीकरण प्रोत्साहन योजना (UP Krishi Yantra Anudan Yojana 2026)’ का संचालन किया जा रहा है।

इस योजना के तहत व्यक्तिगत किसानों को 40% से 50% और अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला किसानों एवं किसान समूहों (FPO/SHG) द्वारा कस्टम हायरिंग सेंटर (Custom Hiring Centre - CHC) व फार्म मशीनरी बैंक (FMB) स्थापित करने पर 80% तक की भारी सब्सिडी (अधिकतम ₹8 लाख से ₹10 लाख) प्रदान की जाती है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम गन्ना किसानों के लिए उपयोगी प्रमुख 10 कृषि यंत्रों, उनकी सब्सिडी दरों, upagriculture.com पर ई-लॉटरी टोकन व्यवस्था, आवश्यक दस्तावेजों और डीबीटी भुगतान की पाई-पाई प्रक्रिया समझेंगे।

1. गन्ना खेती के प्रमुख कृषि यंत्र एवं सब्सिडी दर तालिका 2026

कृषि यंत्र का नाम (Equipment)उपयोगिता व कार्यबाजार मूल्य (अनुमानित)सामान्य वर्ग सब्सिडी (40-50%)SC/ST/महिला/FPO सब्सिडी (80%)
डबल रो ट्रेंच ओपनर (Trench Opener)4.5 से 5 फीट पर गहरी व सटीक नाली बनाना₹45,000 - ₹65,000₹25,000₹45,000 तक
रोटावेटर (Rotavator 6 to 8 Feet)मिट्टी को भुरभुरा बनाना व खरपतवार नष्ट करना₹1,10,000 - ₹1,45,000₹45,000 - ₹55,000₹90,000 तक
सुगरकेन कटर प्लांटर (Automatic Planter)एक साथ नाली बनाना, खाद डालना, बीज काटना व मिट्टी ढकना₹1,80,000 - ₹2,50,000₹75,000 - ₹1,00,000₹1,60,000 तक
सुगरकेन थ्रैश कटर / मल्चर (Mulcher)सूखी पत्ती को बारीक काटकर खेत में जैविक खाद बनाना₹1,60,000 - ₹2,20,000₹70,000 - ₹85,000₹1,40,000 तक
लेजर लैंड लेवलर (Laser Land Leveler)खेत को 100% समतल करना (30% पानी की बचत)₹3,20,000 - ₹3,80,000₹1,40,000 - ₹1,60,000₹2,50,000 तक
सुगरकेन रेटून मैनेजर (Ratoon Manager - SRM)पेड़ी गन्ने के ठूंठ की छंटाई, गहरी जुताई व खाद डालना₹1,20,000 - ₹1,60,000₹50,000 - ₹65,000₹1,10,000 तक
पावर वीडर (Power Weeder 7-9 HP)गन्ने की कतारों के बीच हल्की गुड़ाई व निराई₹75,000 - ₹1,10,000₹35,000 - ₹50,000₹70,000 तक
फार्म मशीनरी बैंक (FMB for FPO)5-8 आधुनिक यंत्रों का पूरा सेट (गाँव के लिए)₹10,00,000 - ₹15,00,000₹4,00,000 (40%)₹8,00,000 (80% अनुदान)

2. पारदर्शी ‘ई-लॉटरी प्रणाली (E-Lottery System)’ कैसे काम करती है?

पहले ‘पहले आओ-पहले पाओ’ व्यवस्था में कुछ ही मिनटों में सर्वर क्रैश होने या दलालों द्वारा टोकन हथियाने की शिकायतें आती थीं। वर्ष 2026 में उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरी प्रक्रिया को 100% निष्पक्ष और कम्प्यूटरीकृत ‘ई-लॉटरी (E-Lottery System)’ में बदल दिया है:

[ऑनलाइन आवेदन विंडो (15 दिन)] ➔ [सिक्योरिटी मनी जमा] ➔ [डीएम की अध्यक्षता में लाइव रैंडम ई-लॉटरी] ➔ [चयनित किसानों को SMS] ➔ [यंत्र खरीद व भौतिक सत्यापन]
  1. आवेदन अवधि: पोर्टल पर 10 से 15 दिनों तक सभी किसान बिना किसी जल्दबाजी के अपनी पसंद के यंत्र के लिए आवेदन करते हैं।
  2. जमानत धनराशि (Security Deposit):
    • ₹10,000 से कम सब्सिडी वाले यंत्रों के लिए: शून्य (कोई टोकन मनी नहीं)।
    • ₹10,000 से ₹1 लाख तक सब्सिडी वाले यंत्रों के लिए: ₹2,500।
    • ₹1 लाख से अधिक सब्सिडी वाले यंत्रों के लिए: ₹5,000।
  3. कलेक्ट्रेट सभागार में खुली लॉटरी: जिलाधिकारी (DM) और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की निगरानी में एनआईसी (NIC) के सॉफ्टवेयर द्वारा रैंडम ड्रॉ निकाला जाता है जिसका लाइव प्रसारण यूट्यूब पर भी होता है।
  4. प्रतीक्षा सूची (Waiting List): मुख्य लाभार्थियों के साथ 50% किसानों की वेटिंग लिस्ट भी बनती है ताकि यदि कोई किसान यंत्र न खरीदे, तो स्वतः अगले किसान को मौका मिले।

3. आवेदन हेतु आवश्यक 6 प्रमुख दस्तावेज व शर्तें (Eligibility)

  • आवेदक उत्तर प्रदेश का मूल निवासी और पंजीकृत किसान होना चाहिए।
  • आवेदक के नाम पर न्यूनतम 35 HP का ट्रैक्टर पंजीकृत होना चाहिए (ट्रैक्टर चालित यंत्रों के लिए)।
  • दस्तावेज सूची:
    1. किसान पंजीकरण संख्या (9 डिजिट UP Agriculture Farmer ID)।
    2. आधार कार्ड व आधार लिंक मोबाइल नंबर।
    3. ट्रैक्टर की आरसी (Registration Certificate) की प्रति।
    4. बैंक पासबुक (जिसमें डीबीटी सक्रिय हो)।
    5. जाति प्रमाण पत्र (केवल SC/ST किसानों के लिए 80% अतिरिक्त छूट हेतु)।
    6. शपथ पत्र (विगत 3 वर्षों में उसी यंत्र पर सब्सिडी न लेने का प्रमाण)।

4. कृषि यंत्र खरीदने व सब्सिडी खाते में आने की 4-चरणीय प्रक्रिया

  1. टोकन स्वीकृति पत्र (Sanction Letter): ई-लॉटरी में नाम आने पर किसान पोर्टल से स्वीकृति पत्र डाउनलोड करें।
  2. डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत अधिकृत डीलर से खरीद: किसान कृषि विभाग द्वारा अधिकृत (Emparneled) किसी भी पंजीकृत डीलर/निर्माता से अपनी पसंद का ब्रांडेड कृषि यंत्र खरीदता है और उसका पक्का जीएसटी बिल (GST Invoice) व यंत्र का सीरियल नंबर प्राप्त करता है।
  3. दस्तावेज अपलोडिंग: बिल कटने के 20 दिनों के भीतर पोर्टल पर इनवॉइस, ट्रैक्टर आरसी और यंत्र के साथ किसान की जियो-टैग फोटो अपलोड की जाती है।
  4. कृषि रक्षा अधिकारी द्वारा स्थलीय भौतिक सत्यापन: ब्लॉक तकनीकी प्रबंधक (BTM) या उप कृषि निदेशक की टीम किसान के घर/खेत पर आकर यंत्र के चेसिस नंबर का मिलान करती है। सत्यापन रिपोर्ट लगने के ठीक 72 घंटों में सब्सिडी की पूरी धनराशि किसान के बैंक खाते में आरटीजीएस द्वारा ट्रांसफर हो जाती है।

5. सुगरकेन कटर प्लांटर व स्वचालित ट्रेंच ओपनर का आर्थिक विश्लेषण

पारंपरिक विधि से 5 एकड़ गन्ने की बुवाई बनाम आधुनिक सुगरकेन कटर प्लांटर (Automatic Planter) से बुवाई का तुलनात्मक खर्च:

कार्य व व्यय मदपारंपरिक विधि (मजदूर + हल)स्वचालित सुगरकेन कटर प्लांटर
खेत में नाली निर्माण₹1,500 प्रति एकड़ (ट्रैक्टर + रिजर)₹0 (मशीन स्वतः बनाती है)
गन्ना बीज कटाई व ढुलाई₹3,000 प्रति एकड़ (10 मजदूर)₹0 (मशीन साबुत गन्ने से आंख काटती है)
बीज शोधन व कीटनाशक स्प्रे₹800 प्रति एकड़₹0 (मशीन में इन-बिल्ट केमिकल नोजल)
खाद डालना व बीज बिछाना₹1,500 प्रति एकड़ (मजदूरी)₹0 (मशीन में खाद व बीज हॉपर)
मिट्टी चढ़ाना व पाटा लगाना₹1,200 प्रति एकड़₹0 (मशीन के पीछे पाटा रोलर)
कुल प्रति एकड़ खर्च₹8,000 प्रति एकड़मात्र ₹2,200 प्रति एकड़ (डीजल + ऑपरेटर)
5 एकड़ पर शुद्ध बचत₹40,000 कुल खर्चमात्र ₹11,000 (सीधी ₹29,000 की बचत)

6. कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) स्थापित कर ग्रामीण युवाओं की ₹50,000/माह कमाई

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण युवा और प्रगतिशील किसान 80% सरकारी सब्सिडी पर ₹10 लाख का फार्म मशीनरी बैंक (CHC) स्थापित करके अपने ब्लॉक के सैकड़ों किसानों को किराए पर आधुनिक यंत्र उपलब्ध करा सकते हैं:

  • ट्रेंच ओपनर का किराया: ₹800 से ₹1,000 प्रति एकड़।
  • रोटावेटर जुताई का किराया: ₹900 से ₹1,200 प्रति एकड़।
  • सुगरकेन मल्चर से पत्ती काटना: ₹1,200 प्रति एकड़।
  • मासिक शुद्ध आय: पेराई व बुवाई सीजन में सभी खर्च काटकर ₹50,000 से ₹80,000 प्रति माह की स्थायी कमाई।

7. कृषि यंत्रों के नियमित रख-रखाव, ग्रीसिंग व ब्लेड सुरक्षा के 6 नियम

  1. रोटावेटर ब्लेड्स की नियमित जांच: प्रति 50 एकड़ जुताई के बाद रोटावेटर के ‘एल-टाइप (L-Shape)’ और ‘सी-टाइप (C-Shape)’ बोरोन स्टील ब्लेड्स की धार जांचें। घिसे हुए ब्लेड्स से ट्रैक्टर पर 20% अधिक लोड पड़ता है।
  2. गियरबॉक्स ऑयल का स्तर: रोटावेटर और मल्चर के मुख्य गियरबॉक्स में 90-ग्रेड अथवा 140-ग्रेड हैवी गियर ऑयल का स्तर हर 100 घंटे बाद जांचें और साल में एक बार ऑयल अवश्य बदलें।
  3. पीटीओ शाफ्ट (PTO Shaft) सुरक्षा व ग्रीसिंग: पीटीओ शाफ्ट के दोनों यूनिवर्सल जोड़ों (Cross Joints) पर रोजाना सुबह काम शुरू करने से पहले लिथियम बेस्ड ग्रीस लगाएं और पीटीओ सेफ्टी कवर हमेशा लगा कर रखें।
  4. ट्रेंच ओपनर विंग्स का समायोजन: ट्रेंच नाली बनाते समय दोनों पंखों (Wings) का कोण 45 डिग्री पर रखें ताकि नाली की दीवारें भुरभुरी रहें और मिट्टी ऊपर खेत में न फैले।
  5. मल्चर के हैमर ब्लेड्स का संतुलन: सुगरकेन मल्चर चलाते समय खेत में ईंट-पत्थर या लोहे के टुकड़ों से बचाएं। यदि कोई एक ब्लेड टूट जाए तो तुरंत नया ब्लेड लगाएं अन्यथा वाइब्रेशन से शाफ्ट टेढ़ा हो सकता है।
  6. सीजन समाप्ति पर यंत्र भंडारण: पेराई सत्र के बाद यंत्रों को पानी से धोकर, जंगरोधी ऑयल (Anti-Rust Coating) लगाकर छायादार शेड में लकड़ी के गुटकों पर रखें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Top 10 FAQs)

UP में रोटावेटर पर कितनी सरकारी सब्सिडी मिलती है?

6 से 8 फीट के रोटावेटर पर सामान्य वर्ग के किसानों को ₹40,000 से ₹50,000 और लघु/सीमांत व महिला किसानों को 50% तक (अधिकतम ₹55,000) सब्सिडी मिलती है।

ई-लॉटरी में नाम न आने पर क्या टोकन मनी का पैसा वापस मिलता है?

हां, यदि ई-लॉटरी में चयन नहीं होता है, तो जमा की गई ₹2,500 या ₹5,000 की जमानत राशि सीधे किसान के उसी बैंक खाते में शत-प्रतिशत वापस (Refund) हो जाती है।

एक किसान एक वित्तीय वर्ष में कितने कृषि यंत्रों पर सब्सिडी ले सकता है?

एक किसान परिवार को 1 वित्तीय वर्ष में अधिकतम 2 अलग-अलग कृषि यंत्रों पर सरकारी अनुदान प्राप्त करने की पात्रता होती है।

क्या किराए पर ट्रैक्टर होने पर भी कृषि यंत्र सब्सिडी मिल सकती है?

नहीं, ट्रैक्टर चालित यंत्रों के लिए किसान अथवा उसके परिवार के रक्त संबंधी (पिता/पुत्र/पति/पत्नी) के नाम पर ट्रैक्टर की आरसी होना अनिवार्य है।

गन्ना कटाई व बुवाई के लिए सबसे बेहतरीन कृषि यंत्र कौन सा है?

सुगरकेन कटर प्लांटर और ट्रेंच ओपनर गन्ना बुवाई के लिए तथा रैटून मैनेजर पेड़ी प्रबंधन के लिए सबसे उपयोगी और लागत घटाने वाले यंत्र हैं।

कृषि यंत्र अनुदान का ऑनलाइन फॉर्म किस वेबसाइट पर भरा जाता है?

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल upagriculture.com पर ऑनलाइन आवेदन किया जाता है।

क्या कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) के लिए 80% सब्सिडी व्यक्तिगत किसान को मिलती है?

80% सब्सिडी किसान उत्पादक संगठनों (FPO), ग्राम पंचायतों और पंजीकृत किसान स्वयं सहायता समूहों को मिलती है। व्यक्तिगत किसान को 40% से 50% मिलती है।

बिल अपलोड करने के कितने दिनों बाद सब्सिडी बैंक में आती है?

भौतिक सत्यापन पूरा होने के सामान्यतः 15 से 20 कार्य दिवसों के भीतर पीएफएमएस (PFMS) प्रणाली द्वारा सब्सिडी सीधे खाते में आ जाती है।

क्या पुराने यंत्र को बेचकर नया लेने पर सब्सिडी मिलती है?

एक बार जिस यंत्र पर सब्सिडी ली गई है, उस प्रकार के यंत्र पर अगले 3 से 5 वर्षों तक दोबारा सब्सिडी नहीं ली जा सकती।

कृषि यंत्र योजना में किसी भी शिकायत या सहायता के लिए नोडल अधिकारी कौन हैं?

जिले के उप कृषि निदेशक (DD Agriculture) अथवा कलेक्ट्रेट स्थित कृषि भवन कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।


📞 महत्वपूर्ण हेल्पलाइन और संपर्क सूत्र

  • उत्तर प्रदेश गन्ना किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-121-3203
  • गन्ना आयुक्त मुख्यालय लखनऊ कंट्रोल रूम: 0522-2236403
  • ई-गन्ना ऐप एवं सट्टा पोर्टल: enquiry.caneup.in
  • विभागीय पोर्टल: upcane.gov.in

8. कृषि यंत्र अनुदान योजना में ई-लॉटरी प्रक्रिया, बिल अपलोड एवं सत्यापन की संपूर्ण विधि

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग द्वारा अनुदान वितरण में शत-प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘पहले आओ-पहले पाओ’ व्यवस्था को समाप्त कर अब पारदर्शी ई-लॉटरी (E-Lottery) प्रणाली लागू की गई है:

[वेबसाइट पर टोकन बुकिंग] -> [जिलाधिकारी की अध्यक्षता में ई-लॉटरी] -> [चयनित किसानों को SMS] -> [अधिकृत डीलर से खरीद] -> [पोर्टल पर बिल व जीपीएस फोटो अपलोड] -> [DCO / कृषि अभियंता भौतिक सत्यापन] -> [DBT द्वारा सीधे बैंक में सब्सिडी]

(क) ई-लॉटरी चयन के बाद आवश्यक दस्तावेज एवं बिलिंग नियम:

  • अधिकृत निर्माता व डीलर: यंत्र केवल उन्हीं कंपनियों या डीलरों से खरीदें जो कृषि विभाग के पोर्टल पर रजिस्टर्ड और सूचीबद्ध हों। बिना जीएसटी (GST) वाले गैर-पंजीकृत लोकल बिल मान्य नहीं होंगे।
  • सीरियल नंबर व चेसिस प्लेट: खरीदे गए रोटावेटर, कटर प्लांटर या मल्चर पर कंपनी की मेटल नंबर प्लेट स्पष्ट रूप से रिवेट होनी चाहिए।
  • फोटो सत्यापन: किसान को यंत्र के साथ खड़े होकर अपनी जीपीएस लोकेशन ऑन रखकर पोर्टल पर फोटो अपलोड करनी होती है।

(ख) विभिन्न यंत्रों पर प्रति एकड़ समय व डीजल की बचत:

  1. ऑटोमैटिक केन कटर प्लांटर: पारंपरिक विधि में बुवाई हेतु 15 से 20 मजदूरों की जरूरत होती थी, जबकि कटर प्लांटर केवल 2 मजदूरों और 1 ट्रैक्टर ऑपरेटर के साथ 1 घंटे में 1 एकड़ गन्ने की बुवाई, खाद डालना और पाटा लगाने का काम पूरा कर देता है।
  2. रेटून मैनेजमेंट डिवाइस (RMD): पेड़ी गन्ने की कटाई के बाद ठूंठों की छंटाई, पुरानी जड़ों की कटाई और कतारों के दोनों तरफ खाद डालने का काम एक ही पास में कर देता है, जिससे पेड़ी की पैदावार में 25% की सीधी बढ़ोतरी होती है।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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