
उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट में जैसे ही मानसून की विदाई होती है और सितंबर-अक्टूबर की सुहानी ठंडक दस्तक देती है, किसानों के लिए वर्ष का सबसे सुनहरा मौका शुरू हो जाता है — शरदकालीन गन्ना बुवाई (Autumn Sugarcane Planting)।
परंपरागत रूप से उत्तर प्रदेश के अधिकांश किसान गेहूं कटाई के बाद अप्रैल-मई में गन्ने की बुवाई करते हैं (जिसे ‘गरमा बुवाई’ या लेट बुवाई कहते हैं)। लेकिन देर से बोए गए गन्ने को जमाव और कल्ले (Tillering) फूटने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता और मई-जून की भीषण लू गन्ने की पोरियों को सुखा देती है, जिससे उत्पादन 250 से 300 क्विंटल प्रति एकड़ पर ही सिमट जाता है।
इसके विपरीत, यदि आप 15 सितंबर से 30 अक्टूबर के बीच ट्रेंच विधि से शरदकालीन बुवाई करते हैं, तो आपकी फसल को सर्दियों से पहले पूरा 60 दिन का समय मिलता है जिसमें गन्ने के प्रति थान (Clump) में 12 से 18 मजबूत कल्ले निकलते हैं। आइए समझते हैं कि यूपी में ट्रेंच विधि से शरदकालीन गन्ना बुवाई कैसे की जाती है।
🌾 शरदकालीन बुवाई बनाम बसंतकालीन बुवाई: सीधा तुलनात्मक लाभ
| मानक (Parameters) | शरदकालीन बुवाई (सितंबर-अक्टूबर) | बसंतकालीन बुवाई (फरवरी-मार्च) | सीधा किसान लाभ |
|---|---|---|---|
| औसत पैदावार (प्रति एकड़) | 550 से 650 क्विंटल | 350 से 450 क्विंटल | +150 से 200 क्विंटल अधिक |
| गन्ने की औसत ऊंचाई | 12 से 14 फीट (मोटा तना) | 8 से 10 फीट | अधिक वजन व बायोमास |
| कल्लों (Tillers) की संख्या | 12 से 16 प्रति मेढ़ा | 6 से 8 प्रति मेढ़ा | दोगुना फुटाव |
| सह-फसली खेती (Intercrop) | सरसों, आलू, मटर, लहसुन संभव | मूंग, उड़द ही संभव | ₹40,000–₹50,000 अतिरिक्त आय |
| कीट व बीमारियों का प्रकोप | कम (सर्दियों में कीट सुप्त रहते हैं) | अधिक (गर्मी में टॉप बोरर का हमला) | कीटनाशक स्प्रे का खर्च बचता है |
| चीनी परता (Sugar Recovery) | 12.5% – 13.5% | 10.5% – 11.5% | मिलों द्वारा पहले इंडेंट पर तौल |
🚜 ट्रेंच विधि (Trench Method) से खेत की वैज्ञानिक तैयारी
ट्रेंच विधि में पारंपरिक हल से कूंड (Furrow) निकालने के बजाय विशेष ट्रेंच ओपनर (Trench Opener) से गहरी नालियां बनाई जाती हैं:
- गहरी जुताई (Deep Ploughing): सबसे पहले खेत की एक बार मिट्टी पलटने वाले हल (एमबी प्लाउ) से और दो बार कल्टीवेटर या रोटावेटर से जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए।
- नाली से नाली की दूरी (Row-to-Row Spacing):
- सामान्य मिट्टी के लिए: 4 फीट (120 सेमी)
- उपजाऊ दोमट मिट्टी व सह-फसली खेती के लिए: 4.5 से 5 फीट (135–150 सेमी)
- नाली की गहराई व चौड़ाई: नाली की गहराई 30 सेमी (10 से 12 इंच) और नीचे की चौड़ाई 25 सेमी होनी चाहिए।
- ट्रेंच विधि का सबसे बड़ा लाभ: गन्ना जमीन से 1 फीट नीचे नाली में बोया जाता है। जब जून-जुलाई में मिट्टी चढ़ाई जाती है, तो पौधे की जड़ें 2 फीट गहरी हो जाती हैं। नतीजा यह होता है कि आंधी-तूफान में भी गन्ना कभी नहीं गिरता (No Lodging)।
🧪 बेसल खाद का अचूक फॉर्मूला (प्रति एकड़ डोज)
नाली निकालने के बाद गन्ने का टुकड़ा रखने से ठीक पहले नाली के तल में यह संतुलित बेसल डोज डालना अनिवार्य है:
| खाद / पोषक तत्व | अनुशंसित मात्रा (प्रति एकड़) | कार्य व महत्व |
|---|---|---|
| सड़ी हुई गोबर की खाद / प्रेसमड | 4 से 5 ट्रॉली (या 500 किग्रा कंपोस्ट) | मिट्टी में जीवांश (Organic Carbon) बढ़ाना |
| डी DAP (Di-Ammonium Phosphate) | 50 किलोग्राम (1 बोरी) | जड़ों के तीव्र विकास हेतु फॉस्फोरस |
| एमओपी पोटाश (Muriate of Potash) | 40 किलोग्राम | तने को मजबूती, सूखा व ठंड से सुरक्षा |
| यूरिया (Urea - बेसल डोज) | 25 किलोग्राम (आधी बोरी) | प्रारंभिक वानस्पतिक वृद्धि के लिए नाइट्रोजन |
| जिंक सल्फेट (21% या 33%) | 10 किग्रा (21%) या 5 किग्रा (33%) | गन्ने की पत्तियों में क्लोरोफिल निर्माण |
| फिप्रोनिल 0.3% GR (कीटनाशक) | 8 से 10 किलोग्राम | दीमक, सफेद गिडार व कंसुआ से सुरक्षा |
[!WARNING] डीएपी (DAP) और जिंक सल्फेट को कभी भी एक साथ मिलाकर न रखें। जिंक को बुवाई से पहले खेत की अंतिम जुताई में मिला दें और डीएपी व पोटाश को नाली में डालें।
✂️ बीज चयन व टुकड़ों की कटाई (Seed Sett Preparation)
- स्वस्थ बीज का चयन: केवल 8 से 10 महीने पुराने स्वस्थ गन्ने का ही बीज चुनें। गन्ने के ऊपरी दो-तिहाई (Top 2/3rd) भाग की आंखों में जमाव क्षमता 90% से अधिक होती है, अतः ऊपरी भाग को प्राथमिकता दें।
- दो-आंख के टुकड़े: गन्ने को हमेशा दो-आंख वाले टुकड़ों (2-Bud Setts) में काटें। एक-आंख वाले टुकड़े से भी बुवाई हो सकती है यदि खेत में ड्रिप सिंचाई उपलब्ध हो।
- बीज शोधन (Seed Treatment): 100 लीटर पानी में 100 ग्राम बाविस्टिन और 200 मिली इमिडाक्लोप्रिड घोलकर बीज के टुकड़ों को 15 मिनट तक डुबोएं। इससे लाल सड़न, स्मट और उकठा रोग की संभावना शून्य हो जाती है।
📐 नाली में बीज रखने का तरीका और मिट्टी ढंकना (Sowing & Covering)
- टुकड़ा रखने का तरीका (End-to-End Placement): नाली के तल में टुकड़ों को ‘सिरे से सिरा मिलाकर’ (End to End) रखें। टुकड़ों को एक-दूसरे के ऊपर न चढ़ाएं।
- मिट्टी की परत (Soil Covering): यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है। बीज के ऊपर केवल 2 से 2.5 इंच (5 से 6 सेमी) भुरभुरी मिट्टी ही डालें। यदि आपने 5-6 इंच मिट्टी डाल दी, तो गन्ने की आंखें दम घुटने से सड़ जाएंगी और जमाव मात्र 40% रह जाएगा।
- हल्की सिंचाई (First Light Irrigation): बुवाई के तुरंत बाद नाली में हल्का पानी लगाएं। ध्यान रहे कि पानी नाली के ऊपरी मेढ़े तक न चढ़े, केवल नाली के पेंदे में ही बहे।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्र.1: शरदकालीन बुवाई का सबसे आदर्श समय कौन सा है?
उत्तर: उत्तर प्रदेश में शरदकालीन गन्ने की बुवाई का सर्वोत्तम समय 15 सितंबर से 25 अक्टूबर तक होता है। 15 नवंबर के बाद तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिरने पर गन्ने का जमाव बहुत धीमा हो जाता है।
प्र.2: क्या ट्रेंच विधि में बीज ज्यादा लगता है?
उत्तर: नहीं! सामान्य विधि (2.5 से 3 फीट पर खूड़) में प्रति एकड़ 30 से 35 क्विंटल बीज लग जाता है। जबकि 4.5 फीट ट्रेंच विधि में प्रति एकड़ मात्र 20 से 22 क्विंटल (दो आंख के टुकड़े) बीज ही लगता है, जिससे बीज का खर्च 30% बचता है।
प्र.3: क्या शरदकालीन गन्ने के बीच ट्रैक्टर चल सकता है?
उत्तर: हाँ! 4.5 से 5 फीट की दूरी होने के कारण आप मिनी ट्रैक्टर (20-25 HP) या पावर वीडर चलाकर आसानी से खरपतवार नियंत्रण और मिट्टी चढ़ाने का काम बिना मजदूरों के कर सकते हैं।
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