खेती फिर घाटे का सौदा: डीजल, उर्वरक और पेस्टीसाइड की बढ़ती महंगाई ने घटाया किसान का मुनाफा

खेती फिर घाटे का सौदा: डीजल, उर्वरक और पेस्टीसाइड की बढ़ती महंगाई ने घटाया किसान का मुनाफा

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डीजल, खाद, बीज की बढ़ी कीमतों ने खेती को फिर घाटे का सौदा बनाया है। पिछले एक साल में डीजल औसतन 15-20 रुपए लीटर महंगा हुआ तो पेस्टीसाइड और बीज की कीमतों में 10-20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

डीजल, खाद, बीज की बढ़ी कीमतों ने खेती को फिर घाटे का सौदा बनाया है। पिछले एक साल में डीजल औसतन 15-20 रुपए लीटर महंगा हुआ तो पेस्टीसाइड और बीज की कीमतों में 10-20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

खेती में इस्तेमाल होने वाले डीजल, खाद, उर्वरक और कीटनाशकों के रेट में पिछले एक साल में 10-20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जनवरी 2021 से जनवरी 2022 के बीच डीजल औसत 15-20 रुपए लीटर महंगा हुआ है। जबकि एनपीके उर्वरक की 50 किलो की बोरी 265 से 275 रुपए महंगी हुई है।

खेती में इस्तेमाल होने वाले डीजल, खाद, उर्वरक और कीटनाशकों के रेट में पिछले एक साल में 10-20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जनवरी 2021 से जनवरी 2022 के बीच डीजल औसत 15-20 रुपए लीटर महंगा हुआ है। जबकि एनपीके उर्वरक की 50 किलो की बोरी 265 से 275 रुपए महंगी हुई है। 

जबकि साल 2022-23 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 40 रुपए प्रति कुंटल और पिछले साल (खरीद विपणन सीजन 2021-22) के लिए धान की एमएसपी में 72 रुपए प्रति कुंटल की बढ़ोतरी हुई थी। जबकि इस दौरान कीट, रोग और खरपतवार नाशक दवाओं में 10-20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

जबकि साल 2022-23 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 40 रुपए प्रति कुंटल और पिछले साल (खरीद विपणन सीजन 2021-22) के लिए धान की एमएसपी में 72 रुपए प्रति कुंटल की बढ़ोतरी हुई थी। जबकि इस दौरान कीट, रोग और खरपतवार नाशक दवाओं में 10-20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 

खेती की बढती लागत के अलावा किसान एमएसपी से कम रेट पर बिकती फसलों से भी परेशान हैं। यूपी के बरेली जिले में गेहूं में छिड़काव के लिए यूरिया लेने आए 19 साल के रामवीर कहते हैं, "खेती में ऐसा है कि एक कुंटल धान बेचकर एक बोरी (50 किलो) डीएपी नहीं खरीद सकते।

खेती की बढती लागत के अलावा किसान एमएसपी से कम रेट पर बिकती फसलों से भी परेशान हैं। यूपी के बरेली जिले में गेहूं में छिड़काव के लिए यूरिया लेने आए 19 साल के रामवीर कहते हैं, "खेती में ऐसा है कि एक कुंटल धान बेचकर एक बोरी (50 किलो) डीएपी नहीं खरीद सकते। 

एमएसपी कुछ भी हो, हमने तो 1000 रुपए में धान बेचा था।" डीएपी की सरकारी कीमत 1206 रुपए है लेकिन कई जगह वो 1400-1600 में बिकती है।

एमएसपी कुछ भी हो, हमने तो 1000 रुपए में धान बेचा था।" डीएपी की सरकारी कीमत 1206 रुपए है लेकिन कई जगह वो 1400-1600 में बिकती है। 

"खेती की लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, लेकिन फसल के दाम उस तरह नहीं बढ़े। महंगाई का आलम ये है कि गन्ने की फसल में घास (खरपतवार) मारने की एक दवा आती है वो पिछले साल 170 रुपए की 100 ग्राम थी, इस साल 270 रुपए की हो गई है।

"खेती की लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, लेकिन फसल के दाम उस तरह नहीं बढ़े। महंगाई का आलम ये है कि गन्ने की फसल में घास (खरपतवार) मारने की एक दवा आती है वो पिछले साल 170 रुपए की 100 ग्राम थी, इस साल 270 रुपए की हो गई है।

जबकि गन्ने पर 5 साल में सिर्फ 25-35 रुपए प्रति कुंटल बढ़े हैं यानि 5 रुपया कुंटल। अब बाकी हिसाब आप लगा लो।" बिजनौर के बुजुर्ग किसान कुलवीर सिंह प्रधान खेती में बढ़ते खर्च का खाका समझाते हैं।

जबकि गन्ने पर 5 साल में सिर्फ 25-35 रुपए प्रति कुंटल बढ़े हैं यानि 5 रुपया कुंटल। अब बाकी हिसाब आप लगा लो।" बिजनौर के बुजुर्ग किसान कुलवीर सिंह प्रधान खेती में बढ़ते खर्च का खाका समझाते हैं।

भारत में 42.6 फीसदी लोग रोजगार के लिए कृषि पर निर्भर- पाकिस्तान, चीन से बद्तर हालात

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