📅 Oct 17, 2026
कानपुर में भाव फिर चरम पर — वजह क्या, और गन्ना किसानों को इसका क्या फायदा? जानिए 7 स्लाइड्स में।
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20 जुलाई को भाव 48.18 रुपये था, 26 अगस्त को 65.05 छू लिया। सरकारी दखल से सितंबर में 57.54 पर आया, लेकिन दिवाली नजदीक आते ही फिर 65 रुपये तक पहुंच गया।
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अनुमान 34.3 से घटकर 30.6 मिलियन टन — करीब 11% कम। रेड रॉट-टॉप बोरर बीमारी, जलभराव और चीनी रिकवरी में गिरावट वजह। मिलों के पास 3-3.5 मिलियन टन स्टॉक, मासिक खपत 2.2 मिलियन टन।
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प्रमुख उत्पादक राज्यों में रेड रॉट और टॉप बोरर ने फसल बर्बाद की। महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में अतिवृष्टि से खेतों में पानी भर गया। रोग दिखे तो जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें।
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10 लाख टन शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी का आयात (दशक में पहली बार), डीलरों पर 1,000 क्विंटल स्टॉक सीमा (30 नवंबर तक), थोक उपभोक्ताओं पर सीमा, 15 अक्टूबर से जल्दी पेराई की सलाह।
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एफआरपी 365 रुपये/क्विंटल तय (1 अक्टूबर 2026 से)। 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं — किसान 600 की मांग कर रहे हैं। चीनी एमएसपी 31 से 50 रुपये किलो करने की मांग भी। दाम ऊंचे, पर कमी दिवाली पर नहीं।
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