चीनी मिल

260 पहियों पर 1300 किमी चलकर गन्ने से प्लास्टिक बनाने वाली मशीन कुंभी पहुंची

📅 Oct 24, 2026

✍️ Aamir Raza

260 पहियों पर 1300 किमी चलकर कुंभी पहुंची विशाल मशीन

6 महीने के सफर के बाद देश के पहले गन्ना-से-बायोप्लास्टिक प्लांट का दिल कुंभी पहुंचा — नवंबर से क्या बदलेगा?

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पारादीप से कुंभी तक 1300 किमी का सफर

बेल्जियम में बनी मशीन समुद्री रास्ते से ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंची, फिर 260 पहियों वाले ट्रेलर पर 4 राज्यों और उत्तर प्रदेश के 7 जिलों से होकर कुंभी आई।

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रफ्तार सिर्फ 10-12 किमी प्रतिदिन, खर्च 15 करोड़ रुपये

संकरी सड़कें, बिजली के तार और पुलों की ऊंचाई के कारण ट्रेलर धीरे चला; मुंबई की कंपनी के करीब 35 प्रशिक्षित कर्मी हर कदम साथ रहे।

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20 फीट ऊंची, 147 फीट लंबी विशाल मशीन

साइक्लाइजेशन रिएक्टर प्लांट की सबसे अहम इकाई है; कुंभी इकाई के मुख्य महाप्रबंधक सुनील कुमार यादव के मुताबिक कंपनी 6 महीने से इसका इंतजार कर रही थी।

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गन्ने से चीनी, फिर लैक्टिक एसिड, फिर PLA

उसी परिसर में गन्ना पिसेगा, चीनी बनेगी और उसी से पॉलीलैक्टिक एसिड तैयार होगा — पैकेजिंग, कप-प्लेट, ट्रे, कटलरी, कपड़ा और थ्री-डी प्रिंटिंग तक बनेगा।

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3080 करोड़ का प्लांट, नवंबर से उत्पादन की उम्मीद

सालाना क्षमता 80,000 टन PLA प्रस्तावित; ब्रांड नाम बायोयुग; शिलान्यास 22 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। किसानों को फायदा लंबे समय में मांग बढ़ने और मिल की आर्थिक सेहत सुधरने से मिलेगा — गन्ना मूल्य SAP से ही तय होगा, 2026-27 के SAP की घोषणा अभी बाकी है।

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